आप यूँ समाये रहें मेरे मन में… (10/02/2026)

अक्तूबर २, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१४८

आप यूँ समाये रहें मेरे मन में…

परम पूज्य गुरुजी महाराज,

आप यूँ समाये रहें मेरे मन में
कि आपकी ही झांकी बसे मेरे कण कण में
आपकी याद मेरे संग रहे हर क्षण में
तो कुछ और ना चाहिए होगा जीवन में।

होती है खिन्नता अपने पर
जब कोई भी विचार आता है सिवाये आपके विचार के
और प्रपंच के बीच जीते जीते
जब माजरे सताते हैं घर परिवार के।

कोशिश तो रहती है निरंतर तब भी
कि आपके नाम या मंत्र से जुड़ी रहूँ
पर जो कुछ पलों का भी बिछोड़ा होता है आपकी याद से
तो बाद में कैसा लगता है, मैं कैसे कहूँ।

मेरी गति है आपसे
मेरी मती भी आपसे
आपकी दया से ही
मुक्त हो सकती हूँ दुख संताप से।

शुकराना आपका कि आपने मुझे अपनी शरण में लिया
शुक्राना कि आपने मेरे भीतर उज्ज्वल किया अपने नाम का दिया
मैं तो योग्य भी नहीं जिसके, आपने वो सुख भी मुझे दिया
मेरे उलझे हुए मन को सुलझनों का सहारा दिया।

खुशनसीब हूँ कि हूँ मैं आपकी शरण में
सदा रखियेगा मुझे अपने कमल चरण में
आपकी यादों से बना मंदिर सदा आबाद रहे मेरे मन में
आपकी दिव्यता से परिपूर्ण हो हर क्षण मेरे जीवन में।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

आप यूँ समाये रहें मेरे मन में… (10/02/2026)

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