अक्तूबर ८, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१५४
रास्ता लग रहा था संगीन
रास्ता लग रहा था संगीन
मन का भाव हुआ था दीन
मुसाफ़िर को महसूस हो रही थी थकान
ज़िंदगी लगने लगी थी उसे चट्टान
कैसे जीये? क्या करे?
सोच रहा था डरे डरे।
ऐसी मुश्किल आन पड़ी थी
जिसकी कभी कल्पना भी ना की थी
उदास सा था उसका मन
आँखें भी उसकी रो रहीं थी।
चलते चलते उसे राह में दिखी इक कुटीर
भीतर जाने के लिए हुआ वह अधीर
बनकर एक फ़क़ीर
नैनों में भरे नीर
वह गया भीतर उत्सुक होकर
बैठे थे दो जन ध्यान में खोकर
इक साधारण से आसन के समक्ष
उसे कोई आसन पर ना दिखा प्रत्यक्ष।
देखी उसने इक पुरानी सी चौकी पर
इक दिव्य पुरुष की छोटी सी तस्वीर
उनके आगे थी ज्योत उज्ज्वल
मुसाफ़िर आश्चर्य में था उस पल।
“ब्लेसिंग्स ऑलवेज, गुरुजी”
तस्वीर पर लिखा था
ध्यान से देखने पर
मुसाफ़िर को दिखा था।
वे जन कर रहे थे होठों से जाप
“ओम नमः शिवाय, शिवजी सदा सहाय” कह रहे थे
मुसाफ़िर के आने पर भी वे जाप करते रहे
कुछ पलों में उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
मुसाफ़िर को गुरुजी ने आसन पर दिए दर्शन
तस्वीर के द्वारा उसने पहचान लिया उसी क्षण
अब तो वह भी करने लगा वही जाप
पहले मुश्किल लगा, फिर तो होने लगा अपने आप।
उनसे गुरुजी की महिमा सुनी मुसाफ़िर ने
गुरुजी की ओर हुआ आकर्षित
बाद में इक जन ने दिया उसे अमृत
दूजे ने दिया हलवा प्रसाद
मुसाफ़िर धन्य हुआ
पाकर गुरुजी का आशीर्वाद।
इसके बाद तो क्या कहना था
गुरुजी की धुन में ही रहना था
गुरुजी उसे सफ़र में बढ़ाते चले
अपने क़रीब लाते चले।
रास्ता हुआ रूहानियत से रंगीन
दिखने लगी मंज़िल हसीन
बेशक लग रही थी दूर
लेकिन ठान लिया कि चलना है ज़रूर
उसी ओर
थामे भक्ति की डोर
गुरुजी के संग
होकर उनमें मलंग।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
रास्ता लग रहा था संगीन (10/08/2026)