ज्ञान असीम और सत्ता अनंत (10/26/2026)

अक्तूबर २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१७२

                                                     ज्ञान असीम और सत्ता अनंत 

ज्ञान असीम और सत्ता अनंत
गुरुजी महाराज स्वयं हैं भगवंत
उनकी शरण में कल्याण अखंड
उनकी रहमतों का नहीं कोई अंत।

जिसके जीवन के हर स्वर में जो गूँजे गुरुजी की महिमा का संगीत
तो निश्चय ही गुरुजी बने रहेंगे उसके मीत
और गुरुजी में है सर्वसंपन्नता का निवास
इसलिए अनुग्रहीत होता है उनका हर दास।

सुख और सद्भावना के अंकुर उपजें गुरुजी के आशीर्वाद से
सकारात्मकता का शुभ गान हो भीतर गुरुजी के कृपा प्रसाद से
इस युग में जहाँ जीवन है कठिन और मन होता रहता है मलिन
ऐसे में जैसे गुरुजी का साथ जैसे मिले रात और दिन
हर वह प्राणी है बहुत खुशनसीब यकीनन
और जिसने सौंप दिया गुरुजी को अपना सर्वस्व और अपना जीवन
उसके ऊपर तो अवश्य बरसती है गुरुजी की कृपा अपरम्पार
गुरुजी की दया से वह जीते जी हो जाता है भवसागर के पार।

बेशक हमेशा आसान ना हो भक्ति का रास्ता
पर जिसका गुरुजी से जुड़ा रहे निरंतर वास्ता
उसे कुछ और चाहिए ही नहीं
सलाम उसे करती हैं हवायें
प्रणाम करती हैं उसे सभी दिशायें
उस भक्त के हर कदम को चूमती है ज़मीन
झुक कर उसपर प्यार बरसाता है आसमान
क्यूँकि उसे प्यार करते हैं गुरु करुणानिधान।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ज्ञान असीम और सत्ता अनंत (10/26/2026)

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