अक्तूबर २८, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१७४
मेरी रूह की पुकार
परम पूज्य गुरुवर
आपके पास बैठकर
दिल चाहे आपसे कहूँ कुछ
क्षमा करना अगर मेरी बातें लगें तुच्छ।
आप इतने प्रतापी और इतने दयावान
आप में समाये सभी देवी देवता भगवान
नामुमकिन है करना आपके असीम सौंदर्य और नूर का वर्णन
शुक्राना कि आप करते रहते हैं मार्गदर्शन।
शुक्र करूँ आपका बारम्बार
हर उस दात के लिए जो आपने दी
और हर उस दात के लिए जो नहीं बख़्शी आपने
और अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँगती हूँ आपसे।
नहीं कर सकती कभी भी मैं आपकी रहमतों की गिनती
आपसे बातें करते हुए करती हूँ आपसे विनती
कि निर्मल होती रहे मेरी बुद्धि
मेरे अंतस् की होती रहे शुद्धि
सुख दुख से ग्रस्त होकर भूलूँ ना आपका दिखाया पथ
देते रहिएगा मुझे ऐसी सुमत।
जैसी भी हो परिस्थिति
स्थिर रहे मन की स्थिति
कर्म के मार्ग को सकारात्मकता से चीरते हुए आगे बढ़ने की शक्ति देना
जैसा भी हो रास्ता, आपसे जुड़ी रहूँ हर पल, ऐसी भक्ति देना।
मोह और विषाद से घिर जाऊँ अगर
चलते हुए गिर जाऊँ अगर
तो सम्भाल लेना मुझ नादान को
बढ़ा देना अपनी दया के दान को।
सभी में आप बसते हैं, मेरे गुरुवर
इसलिए किसी को ना पहुँचाऊँ दुख
दुनियावी प्रपंच के बीच में रहकर
आपकी ओर रहे मेरी रूह का रुख़।
मेरी रूह को है आप में समाने का इंतज़ार
देती है मेरी रूह यही पुकार बार बार
जानती हूँ करना है अभी रास्ता भी पार
भरोसा है कि आप ज़रूर सुनेंगे मेरी रूह की पुकार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
मेरी रूह की पुकार (10/28/2026)