मिलता है प्यार, प्यार भरपूर… (10/29/2026)

अक्तूबर २९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१७५

                                    मिलता है प्यार, प्यार भरपूर…

मिलता है प्यार, प्यार भरपूर
गुरुजी की शरण में
पाप प्रवृत्ति होती है दूर
उनके कमल चरण में।

गुरु के मार्गदर्शन बिन
उन्नति बन जाये अवनति
गुरुजी के हुक्म पर चलने से
होती है सदा शिष्य की सद्गति।

सोच नाना प्रकार की
सारे संसार की
छूटने लगती है गुरुजी के सिमरन से
आत्म-निरीक्षण होने लगता है मन मंथन से।

बेशक पहले विष निकले मंथन के दौरान
किंतु उसके पश्चात हो अमृत का पान
दोनों ही हैं गुरुजी के दिए वरदान
ताकि हो जाये उनके शिष्य का कल्याण।

गुरुजी को नहीं चाहिए फूल या फल
वे भक्त के मन का भाव देखें पल पल
भाव हो भोला और सच्चा
तो बिन कुछ चढ़ाये भी सब अच्छा।

भाव में हो गुरुजी के लिए श्रद्धा और प्यार
गुरुजी की ही याद में गुज़ारें दिन हैं जो दो चार
गुरुजी की छवि छायी हो अंतस में
सब कुछ सौंप दिया हो उनके वश में
और गुरुजी का ज्योतिर्मय रूप
बस जाये जिसके भीतर
वो जन तो गुरुजी की कृपा से
निस्संदेह इक दिन जाये तर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मिलता है प्यार, प्यार भरपूर… (10/29/2026)

Leave a Reply