आया है तू इस जग में जब से… (10/30/2026)

अक्तूबर ३०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१७६

              आया है तू इस जग में जब से…

आया है तू इस जग में जब से
कैद होता रहा है व्यर्थ के बंधनों में तब से
अब भी इस दुनिया में तू खोया है
कब से मोह निद्रा में सोया है
रंगा हुआ है तू रंग में राग के
अब तो विवेक से सोच तू जाग के।

बीता जा रहा है समय तू मान ले
केवल गुरुजी तेरे अपने हैं तू जान ले
उन्होंने जगह दी है तुझे अपने चरण में
अपना सर्वस्व समर्पित कर तू उनकी शरण में
क्यूंकि वहीं है तेरा उद्धार
वहीं उतरेगा कर्मों का उधार
वहीं होगा तेरा बेड़ा पार
यही है तेरे उद्देश्य का सार।

अब भी वक़्त है जाग तू
हो जा सतर्क
गुरुजी से माफ़ी माँग तू
छोड़ दे तर्क वितर्क।

गुरुजी के गुणगान के सिंधु में डूब कर
गुरुजी की कृपा से तू जा तर
गुरुजी से जोड़े रख तू अपना चित्त
इसी में है तेरा हित
सुखदायी है गुरुजी का चिंतन और उनकी याद
उनसे उन्हें पाने की कर फ़रियाद
तेरे रोम रोम पर बरसेगा गुरुजी का कृपा प्रसाद
तू जीते जी पायेगा स्वयं को आज़ाद।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरूजी 🙏🙏
धीरजा

आया है तू इस जग में जब से… (10/30/2026)

Leave a Reply