नवंबर १, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१७८
मोहताज़ बनी रहेगी ज़िंदगानी
जीवन है इक विस्तृत सा रंग मंच
जिसपर माया का प्रपंच
खेलता है खेल हर किरदार के संग
और बदल देता है उसकी कहानी के रंग।
बिन शोर किए आस पास रहती है माया
बदलने सबके जीवन की काया
इतनी नज़ाकत से झुक कर
कि बंदा आकर्षित होता है रुक कर
और फिर फँस जाता है अक्सर
और माया करने लगती है अपना असर।
भुला देती है ये माया
कौन अपना कौन पराया
इसलिए चूक हो जाती है
फिर जिंदरी पछताती है।
माया है महेश्वर की शक्ति
इसके द्वारा निरीक्षित होती है भक्त की भक्ति
इस रास्ते पर देने पड़ते हैं इम्तहान
ताकि हो जाये जीव से शिव बनने का ज्ञान।
मायावी है गुरुजी की लीला
वे सदाशिव जो हैं स्वयं
असल धन जब देते हैं वे
उससे पहले तोड़ते हैं अहम और हर भ्रम।
भक्त चल रहा होता है गुरुजी की राह पर
उसे सब कुछ पहले से साफ़ आने लगता है नज़र
किंतु माया अंत तक लेती रहती है इम्तहान
और गुरुजी ही बख़्शते हैं उस विद्या का दान
जिससे भक्त आगे बढ़ जाता है
और रूहानी सीढ़ियाँ चढ़ पाता है।
गुरुजी की शरण में है उपाय
इन सीढ़ियों पर चढ़ते जाने का
माया के पाश को तोड़ पाने का
जीव से शिव बन पाने का।
तब तक ना जाने कब तक चलती रहेगी कहानी
बनकर माया की दीवानी
मन करता रहेगा आनाकानी
और मोहताज बनी रहेगी ज़िंदगानी।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
मोहताज़ बनी रहेगी ज़िंदगानी (11/01/2026)