मई ८, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३००१
शिवत्व का असल स्वरूप
जो हैं शिवत्व का असल स्वरूप
जो हैं दिव्यता का परम पूजनीय रूप
उन गुरुजी महाराज को नमस्कार
उन्हें नमस्कार बारम्बार।
पुरुष रूपी चेतना की सूरत
प्रकृति रूपी माया की मूरत
इसलिए साक्षी होते हुए भी सबसे शक्तिमान
इसलिए ऊर्जा होते हुए दें वे सम्पूर्ण कारणात्मक योगदान।
और फिर प्रकृति और पुरुष के भी पार
गुरुजी महाराज हैं सारी सृष्टि का आधार
ऐसी स्पष्टता नजरिये में वे लाते हैं
कि कुछ अलग से ही नज़ारे नज़र आते हैं
भीतर भी और बाहर भी
ऐसी अद्भुत लीला है उनकी।
परब्रह्म परमेश्वर हैं वे
सदाशिव हैं, सर्वेश्वर हैं वे
अपनी मर्ज़ी से लेते हैं अनेकों रूप
उनकी मर्ज़ी से होती है छाओं और धूप
उनकी आज्ञा से समय चले अपनी रफ़्तार
उनके हुक्म पर मौसम आयें जाएँ बार बार।
गुरुजी मानव कल्याण के लिए आए यहाँ
बनकर इक साधारण इंसान
परंतु ज़्यादा वक़्त तक छुप ना पाई
उनकी लीला महान।
भक्तों के बिन जाने ही अक्सर
कल्याण कर देते हैं गुरुवर
स्थान और समय की सीमा के भी पार
होता है गुरुजी के द्वारा उद्धार
उनकी मर्ज़ी और मौज हो तो
वे तो एक पल में दे सकते हैं तार
यूँ ही तो नहीं उनकी महिमा से गूँज रहा है
ये सारा का सारा संसार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा