गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर (06/26/2026)

जून २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५०

     गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर 

गाँव था इक प्यारा सा
वहाँ का स्पंदन था न्यारा सा
अक्सर वहाँ पर इक फ़क़ीर आता था
जो भी भिक्षा में मिलता था, वो खाता था
धन दौलत से वंचित था, पर रूहानियत में था अमीर
गुरुजी की दया से उनसे जुड़ा था फ़क़ीर।

रूहानियत के नूर से उज्जवल था फ़क़ीर का चेहरा
गुरुजी की मेहर का था उसपर चौबीसों घंटे पहरा
गुरुजी ने उसे बेफ़िक्र होकर जीना सिखाया
समर्पण का मार्ग दिखाया।

फ़क़ीर ने उनका हुक्म माना
उसे मीठा लगता था उनका भाणा
गुरुजी की प्रेरणा से चलता था उसका जीवन
गुरुजी और उनकी बातों में लीन रहता था उसका मन।

कुछ रोग उसे सताते थे
परंतु निराश ना होता था
कोई चिंता सताती भी थी
तो गुरुजी के ख़याल में खोता था।

मन ही मन तरसता था पाने के लिए उनके दर्शन
गुरुजी हुए उसकी भक्ति से प्रसन्न
आया फ़क़ीर के जीवन में वह क्षण
जब दर्शन देने आए भगवन।

फ़क़ीर एक बगिया में से रहा था गुज़र
उसे वहाँ दिखा एक बड़ा सा तरुवर
तरुवर के नीचे छाओं मैं
जुती पहने हुए पाओं में
फ़क़ीर ने देखा गुरुजी महाराज को
हैरान रह गया वो देखकर अपने सरताज को।

पहले तो उसे कुछ समझ ना आया
फिर वो दौड़ कर वहाँ आया
उसने चूम लिए गुरुजी के चरण
हुआ उसकी हर पीड़ा का हरण
गुरुजी ने उसे कहा, “ऐश कर”
धन्य हुआ फ़क़ीर पाकर ऐसा वर
फ़क़ीर गुरुजी के समक्ष नमन में झुका
जब उसने सिर उठाया तो आश्चर्यचकित होकर रुका
गुरुजी हो चुके थे अन्तर्धान
आख़िरकार, वे हैं भगवान
चलती है उनकी ही मर्ज़ी
भक्त तो केवल कर सकते हैं अर्ज़ी।

निरोगी हुए फ़क़ीर के रूह, तन, और मन
बेफिक्री में बीता उसका बाकी का भी जीवन
गुरुजी की बख़्शी हुई सादगी और सरलता से उसने जीवन लिया गुज़ार
बढ़ता रहा उसका गुरुजी के प्रति प्यार
शुक्राना के भाव में जीता रहा फ़क़ीर
टूटती गई उसकी रूह को बाँधने वाली हर ज़ंजीर
आख़िरी श्वास से भी करता रहा गुरुजी को स्मरण
गुरुजी की कृपा से सफल हुआ उसका जीवन
जब आया फ़क़ीर का यहाँ से जाने का समा
गुरुजी की आज्ञा से वह गुरुजी में गया समा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर (06/26/2026)

Leave a comment