जब से गुरुजी ने है अपनाया (07/29/2026)

जुलाई २९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८३

                                       जब से गुरुजी ने है अपनाया 

जब से गुरुजी ने है अपनाया
क्षीण हुआ कष्टों का साया
निखरने लगी रूह की काया
गुरुजी का प्यार भीतर है समाया।

गुरुजी बिन जीवन में था एक अकेलापन
दुनियावी अपनों के बीच में भी ना लगता था मन
भारी लगता था हर बोझ
समझ ना आता था मन किसे रहा है खोज।

गुरुजी बिन दिन के उजाले में भी था अंधकार
भयभीत करता था संसार का व्यापार
रास्ता आता ना था नज़र
रुकावट से घिरी होती थी डगर।

ज़िंदगी लगने लगी थी मुश्किल
क्यूँकि लगता ही नहीं था कहीं भी दिल
गुरुजी जो मिले
तो बंद रास्ते खुले
मुरझाये नसीब खिले
मिटने लगे शिकवे गिले।

गुरुजी में दिल यूँ गया लग
जैसे हर सोई तार गई जग
इक नया उल्लास
इक नया विश्वास
मिली जो गुरुजी की दिशा
तो दूर हुई निराशा की निशा।

सिमरन और सत्संग है गुरुजी ने बख़्शा
करते हैं वे मेरी रक्षा
बुलाकर अपने दर पर
सेवा का दिया अवसर
रखा अपना हाथ मेरे सिर पर
अपने नूर से रोशन की मेरी डगर।

गुरुजी ने थाम ली मेरी जो डोर
तो फिर अपना तो कुछ रहा ही नहीं
सब गुरुजी महाराज के चरणों में अर्पित
जो वे करें, जब करें, जैसे करें, वही सही।

गुरुजी ही हैं अब मेरा संसार
इस पार और उस पार
ये प्यार है या सत्कार
ये जानें वे ही कृपाधार
जिनके कमल चरण के तले
मुझे सुख संतोष का संसार मिले।

अब तो गुरुजी ही प्रेम
गुरुजी ही पूजा
सनातन साथ के लिए
ना चाहिए कोई दूजा।

गुरुजी का शुक्राना करने के लिए
मेरे पास नहीं हैं पर्याप्त अल्फ़ाज़
हर श्वास में शत शत शुक्राना ही हो
ऐसा बना रहे मेरे जीने का अंदाज़।

सर्वसंपन्न रहें मेरे गुरु रूपी भगवान
सदा रहें वे सर्वशक्तिमान
गुरुजी की महिमा का हो पूरी सृष्टि में गुणगान
गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरुजी को सादर प्रणाम।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

जब से गुरुजी ने है अपनाया (07/29/2026)

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