ना जाने कब… (07/30/2026)

जुलाई ३०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८४

                                     ना जाने कब…

ना जाने कब टूट जायें साँसों की लड़ियाँ
व्यर्थ ना जाने पायें ये घड़ियाँ
हर घड़ी है अनमोल
भौतिकता के पार है इसका तोल।

दिनचर्या को बिन रोके
मिलते रहेंगे मौके
सेवा, सिमरन, सत्संग के
गुरुजी की ही किरपा से
हर मौके को आशीर्वाद जान कर
तुम उस से लेना अपनी झोली भर
और भीगते हुए हर आशीर्वाद में
रहते चलना गुरुजी की याद में।

कोई पल, कोई घड़ी, कोई भी दिन
ना गुज़रने देना गुरुजी की याद के बिन
हर श्वास से लेकर गुरुजी का नाम
महसूस करना अपने भीतर का पावन धाम।

वहाँ तुम्हारे हृदयकमल के आसन पर
गुरु साहिब हैं विराजमान
उनकी याद में रहकर उनपर धरोगे ध्यान
तो उन्हें देख पाओगे वहाँ।

उन्ही पर रखते हुए पूर्ण विश्वास
उनमें लीन कर के हर श्वास
हर पल, हर घड़ी को सार्थक बनाना
क्या मालूम कब अगला श्वास हो जाये बेगाना।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ना जाने कब… (07/30/2026)

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