अगस्त २५, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३११०
फ़िक्र
इंसान अक्सर फ़िक्र में खोता है
जब कि वह जानता है कि फ़िक्र करने से कुछ नहीं होता है
बल्कि कुछ होता भी है तो वो है हानि मानसिक या शारीरिक संतुलन की
और जीवन बसर करने में रुकावट बनती है स्थिति मन की
रूहानी उन्नति पर भी होता है असर
हो नहीं पाते हम अग्रसर।
काम तो बनेगा सही वक़्त आने पर ही
ये जानते हैं सभी
और इच्छा ना पूरी हो तो वो कल्याण नहीं
नादानी और अज्ञानता है ऐसा सोचना भी
ज़रूरी तो है कर्म काटने भी
आज या कल, कभी ना कभी।
पूर्ण गुरु हैं गुरुजी महाराज
करते हैं सम्पूर्ण कल्याण
इसलिए पूर्ण रूप में करना होगा उन्हें समर्पण
अक्सर हमें मुश्किल लगता है ये काम
लेकिन ये जो हम कर पायें
तो बेफिक्र हो जायें।
ऐसी आस्था से सजाना होगा रास्ता
जो गुरुजी दिखा रहे हैं
होनहार विद्यार्थी बनकर सीखना होगा
हर पाठ जो गुरुजी सिखा रहे हैं।
जब भी फिक्र होने लगे
कर लें गुरुजी का जाप उसी समय
गुरुजी की याद से अंतस को भर लें
ताकि वहाँ आने के लिए जगह ना पाये फ़िक्र या संशय।
फ़िक्र का बादल अंतस् के आसमान में टहल कर ओझल हो जाएगा
अंतस् का आसमान उसे गुरुजी के नाम से आवरणित कर पायेगा
इस सफ़र में बेफिक्र होना है ज़रूरी
वरना बढ़ जाएगी गुरुजी से दूरी
इसलिए ध्यान रहे कि फ़िक्र कर के ना बनें नादान
फ़िक्र ना ले कभी भी गुरुजी के चिंतन का स्थान
कोशिश करें कि गुरुजी से जोड़े रहें रूहानी तार
गुरुजी करेंगे अपनी कृपा से समय आने पर सबका उद्धार।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
फ़िक्र (08/25/2026)