अगस्त २६, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१११
तन्मय होकर…
तन्मय होकर कर ले चिंतन
विनम्र भाव से कर ले वंदन
गुरुजी महाराज मेहरबान का
सदाशिव करुणानिधान का।
भटकना छोड़ दे इधर उधर
क्यूँकि गुरुजी ले जायेंगे जिधर
वही दिशा सबसे बेहतरीन
इसलिए गुरुजी में रह तल्लीन।
दुनियावी रिश्ते हैं व्यापार
नश्वर है पदार्थों का संसार
इन सबसे मोहित होकर ना बढ़ने दे विकार
विषयों को ना बनने दे जीने का आधार।
भीतर से जोड़े रख गुरुजी से रूहानी तार
आसान हो जायेंगे बिताने यहाँ पर दिन दो चार
और गुरुजी की कृपा से होता चल आगे के लिए तैयार
ताकि तेरा यह जनम ना जाये बेकार।
गुरुजी ने तुझे भेजा है यहाँ
देने कर्मों के इम्तहान
रूहानी उन्नति के लिए
जलाकर शुद्धि और विवेक के दिए।
गुरुजी को जो चेतेगा तेरा चित्त
तो इसमें है तेरा हित
पाप धुलेंगे, कष्ट क्लेश जायेंगे मिट
सिमरन और ध्यान को कर तू विकसित।
समझ चुका है तेरा दिल
कि तेरी रूह है बहुत क़ाबिल
सहयोग दे उसे आगे बढ़ने में
उन्नति की सीढ़ियाँ चढ़ने में।
बेशक तेरी नीयत और तेरे व्यवहार में हो पूरी शिद्दत
दुनिया को तुझसे हमेशा होगी कोई ना कोई शिकायत
इसलिए उन गुरुजी महाराज की कर इबादत
जो सदा अपने चरणों में करेंगे तेरा स्वागत
तुझे मानकर और जानकर अपना बच्चा
क्यूँकि एक यही रिश्ता है सच्चा।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
तन्मय होकर… (08/26/2026)