ितंबर २०, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१३६
अमुक अमुक है अपना
अमुक अमुक है अपना
जब टूटेगा ये सपना
तो इसके लिए गुरुजी का शुक्राना करना
मोह के जाल में फँसे रह जाओगे वरना।
सब पर ये कृपा नहीं होती है
अधिकतर दुनिया मोह में खोती है
यूँ फँसा लेता है मोह का जाल
कि होता है बुरा हाल।
इस से पहले कि बहुत देर हो जाये
इस से पहले कि मन संभल ही ना पाये
और मोह से चिंतन नकारात्मक होता जाये
कर लो गुरुजी द्वारा दिया उपाय।
सीखो प्यार करना अनासक्त होकर
ना कि मोह में खोकर
ऐसा लगता है की ये नहीं मुमकिन
क्यूँकि हम सीख नहीं रहे जीना बंधन के बिन
मोह भी है एक बंधन
बंधकर जिसमें ये मन
सोच, चिंता, और दुख से
दूर होने लगता है सुख से।
गुरुजी के नाम और सिमरन में शक्ति है
हर विकार को नियंत्रण में लाने की
अनासक्त प्यार करना सिखाने की
बेपरवाह होकर जी पाने की।
गुरुजी के हर उपाय में होता है हमारा कल्याण
सर्वस्व गुरुजी को समर्पित करने का है बहुत महत्वपूर्ण योगदान
ये सीखना ही होगा आज नहीं तो कल
करते हुए गुरुजी का शुक्राना पल पल।
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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
अमुक अमुक है अपना (09/20/2026)