ितंबर २४, २०२६
ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏
# ३१४०
…और चाहिए भी क्या
गुरुजी ने बुलाया मुझे अपने दर पर
उनकी कृपा से ऐसे प्रेम की ज्योत जली मेरे भीतर
कि जीवन हुआ उज्जवल
उज्जवल हुआ हर पल
साफ़ आने लगीं नज़र
अपनी ख़ामियाँ
जो छुपी थी भीतर के अँधेरे में…
मिट गए कई भ्रम
भीतर के नए सवेरे में
इस जागरूकता के लिए गुरुजी का शुक्राना
जिनकी कृपा बिन मन था कितनी सच्चाइयों से अनजाना।
हर पल उनसे जुड़े रहने का रहता है प्रयास
उनका मार्गदर्शन है खूबसूरत और खास
और विशेष है उनका बख़्शा मनोबल
जिससे इतनी दुविधाएं जाती हैं टल…
शुक्र है उन्होंने है अपनाया
वरना यहाँ तो हर कोई है पराया
ये सोचना कि कोई हमारा या हम किसी के अपने हैं
ये सब कुछ ही पल के सपने हैं…
क्योंकि कोई दुनियावी रिश्ता हो ही नहीं सकता सनातन
सिवा आत्मीय परिवार के
जिसके सबसे ज्येष्ठ और मुख्य सदस्य हैं गुरुजी स्वयं
उनके बिन किसी का अस्तित्व नहीं
उनके आशीष से होते हैं सबके कारज सही।
प्रेम की ज्योत से उज्ज्वल हुआ जीवन का हर पल
गुरुजी के चरणों में कर पाऊँ समर्पण
ऐसा बन जाये जो मेरा मन
तो गुरुजी होंगे इतने प्रसन्न
गुरु की प्रसन्नता के सिवा
वास्तव में और चाहिए ही क्या?
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा
…और चाहिए भी क्या (09/24/2026)