भीतर भी भोर (10/11/2026)

अक्तूबर ११, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५७

                                   भीतर भी भोर 

रोशनी तक पहुँचने के लिए
यात्रा पूरी करनी होगी अंधकार की
वरना अंधकार में ही रह जाओगे
तो गुरुजी को कैसे पाओगे?

हर आवरण का उतरना ज़रूरी है
बेशक वो हो कर्म का या मल का
ख़त्म करनी है गुरुजी से जो भी दूरी है
तो उनसे जुड़े रहने का प्रयास होना होगा हर पल का।

भक्ति में प्रेम, और प्रेम में भक्ति
इसमें है गुरुजी को आकर्षित करने की शक्ति
हो इसके काबिल तुम
ना हो जाओ प्रपंच में गुम
गुरुजी से जुड़े रहने की कोशिश करते रहो हर क्षण
करो उनकी सेवा, करो उनका चिंतन
उनकी मानस पूजा करो
उनके सत्संग में जुड़ो।

अंधकार की यात्रा चलेगी कब तक
ये तुम ना जानो
लेकिन रोशनी तक पहुँचोगे ज़रूर
बस, गुरुजी का कहा मानो।

परब्रह्म परमेश्वर हैं वे
रूहानी रोशनी हैं वे स्वयं
उनकी कृपा से होगा तुम्हें उनका साक्षात्कार
उनकी मेहर से पीछे छूट जाएगा अंधकार
रोशनी ही रोशनी होगी हर ओर
हो जाएगी भीतर भी भोर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

भीतर भी भोर (10/11/2026)

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