नया उत्साह लाता है हर सवेरा (07/05/2026)

जुलाई ५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५९

          नया उत्साह लाता है हर सवेरा 

नया उत्साह लाता है हर सवेरा
नई उम्मीद जगाता है
सूरज भी उदय होने से पहले
गुरुजी के चरणों में झुक जाता है।

सूरज की हर किरण
करती है गुरुजी को सलाम
हर पंछी उड़ान भरते भरते
लेता है गुरुजी का नाम।

सारी संगत दिन भर
गुरुजी को याद कर
करती है जीवन बसर
पाकर गुरुजी की मेहर।

अस्त होते होते
गुरुजी में खोते खोते
सूरज विदा होता है
पर नहीं जुदा होता है
गुरुजी और उनकी याद से
उनके पावन आशीर्वाद से।

रात का आसमान
करता गुरुजी को प्रणाम
चाँद तारे सजदे में होते
गुरुजी के अमृत से पाप धोते
और फिर टिमटिमाते हुए
अपनी रोशनी फैलाते हुए
ख़ुशी से रात गुज़ारते
पर गुरुजी को नहीं बिसारते।

और पूरे कर दिन के काम
संगत करने लगती आराम
कोई बेफिक्र, कोई परेशान
कोई सहज से, कोई हैरान।

लम्हा हो जो भी और जैसा भी
सब खोए रहें गुरुजी में ही
गुरुजी ही गुरुजी हों बाहर और भीतर
बस, उनकी मेहर से हर पहर यूँ जाये गुज़र।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

नया उत्साह लाता है हर सवेरा (07/05/2026)

सुखदायी होगा सफ़र (07/04/2026)

जुलाई ४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५८

                    सुखदायी होगा सफ़र 

मोह होता है बहुत ही दुखदायी
हर किसी ने इस से अशांति ही है पायी
फिर भी फँसते रहते हैं इसके जाल में
और ख़ुद को पाते हैं बेक़ाबू से हाल में।

पदार्थों में और लोगों में मोह
तरह तरह के भोगों में मोह
स्वयं ही करते हैं अहंकार को पोषित
अपने मन को करते हैं दूषित।

जिसे चाहें, उसे खोने का भय
और साथ में अक्सर क्रोध और संशय
इधर उधर की बातों का रिश्तों पर प्रभाव
कोई प्यारा दूर हो जाये तो सताये उसका अभाव।

गुरुजी महाराज में आसक्त हों जायें
भोगों से, लोगों से अनासक्त हो पायें
ये गुरुजी की मेहर से ही हो पाये
और जीना पहले से सरल हो जाये।

गुरुजी को आकर्षित करें अपनी ओर
उनकी याद में आसक्त रहकर
उनके प्रति प्रेम भाव में बहकर
उनसे दिल की हर बात कहकर।

कमी नहीं बदलते रिश्तों की
जीवन के रंग मंच पर
गुरुजी में जितना मग्न रहेंगे
उतना ही सुखदायी होगा सफ़र।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी🙏🙏
धीरजा

सुखदायी होगा सफ़र (07/04/2026)

सिमरन का सरोवर (07/03/2026)

जुलाई ३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५७

                     सिमरन का सरोवर 

सिमरन के सरोवर में गोते खा कर
गुरुजी की महिमा का गुणगान गा कर
अपने भीतर गुरु प्रेम के रस को भर
गुरुजी की कृपा से तुम जाओगे तर।

सिमरन का सरोवर कोमल है
सिमरन का सरोवर निर्मल है
सिमरन के सरोवर में जो जल है
वो तन, मन, रूह के लिए शीतल है।

औषधि शक्ति है सिमरन में
उत्साह जगाती है जो मन में
आरोग्यता लाती है जो तन में
रूहानियत निखारती है जो जीवन में।

इस सरोवर में जाओगे जितनी गहराई में
रमते जाओगे उतना ही गुरुजी की वडियायी में
उनकी वडियायी में डूबने का नशा
संवार देगा तुम्हारी दिशा और दशा।

सिमरन के सरोवर में गुरुजी का आशीर्वाद है
सिमरन का सरोवर उनका दिया प्रसाद है
इस सरोवर की गहराई में कर पाओगे ध्यान
इस सरोवर में स्नान करने में है सम्पूर्ण कल्याण।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

सिमरन का सरोवर (07/03/2026)

शुक्राना उनकी मेहर-ए-नज़र का (07/02/2026)

जुलाई २, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५६

शुक्राना उनकी मेहर-ए-नज़र का

गुरुजी की शक्ति का
कोई नहीं लगा सकता अनुमान
उनकी शक्ति बेअंत है
वे हैं भगवानों के भी भगवान।

कोई नहीं दे सकता भक्त को उतना प्यार
जितना देते हैं गुरुजी परवरदिगार
उनका प्यार है असीम, निस्वार्थ, अनोखा
इस प्यार में कभी ना हो कोई धोखा।

कोई ना है वैद गुरुजी महाराज के जैसा
उनकी दी दवा है मर्ज़ का सर्वोत्तम इलाज
कोई नहीं बन सकता सहारा गुरुजी के जैसा
वे सदा रखते हैं अपने भक्तों की लाज।

कोई नहीं है गुरुजी के जैसा मित्र
उनके संग मित्रता है अत्यंत पवित्र
शिक्षक ना कोई होगा कभी गुरुजी से उत्तम
जो अपने शिष्य को सिखायें कैसे जीना है ये जीवन।

मार्गदर्शक गुरुजी के जैसा कोई नहीं
वे अपने शागिर्द को मार्ग दिखाएँ सही
कोई नहीं गुरुजी जैसा संचालक
कोई नहीं उनके जैसा प्रतिपालक।

कोई नहीं है गुरुजी महाराज जैसा जीवनदाता
यम देव भी गुरुजी के समक्ष जीत नहीं पाता
कोई नहीं गुरुजी के जैसा दानी
तभी तो संवर गई है उनकी संगत की जिंदगानी।

शुक्राना, शुक्राना, शुक्राना गुरुवर का
शुक्राना गुरुजी के दिव्य दर का
शुक्राना उनके दिए हर वर का
शुक्राना उनकी मेहर-ए-नज़र का।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

शुक्राना उनकी मेहर-ए-नज़र का (07/02/2026)

भवसागर के पार (07/01/2026)

जुलाई १, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५५

          भवसागर के पार 

अक्सर रूहानी ख़ुशबू की बहार
साथ में रूहानी प्यार
मिलता है बेशुमार
जब आते हैं गुरुजी के दरबार।

जन्नत भी इतनी सुंदर ना होगी
जितना सुंदर है गुरुजी का दरबार
सचखंड तो यहीं है
कहे पूरा गुरुपरिवार।

गुरुजी का चाय प्रसाद और लंगर प्रसाद
गुरुजी के सत्संग
गुरबानी का दिव्य रंग
भक्तों के मन में लाता है उमंग।

प्रकृति भी झुक कर करती है सलाम
जब जब लिया जाता है गुरुजी का नाम
गुरुजी का अमृत हरता है रोग को
आशीर्वाद मिलता है भोग को।

शबद की पवित्र आवाज़ जब पहुँचती है भीतर
तो शांति और स्थिरता छूती है मन को
अक्सर गुरुजी का रूहानी स्पर्श
महसूस होता है तन को।

गुरुजी की लीला है ये सब
है ये सब उनकी वडियायी
तभी तो संसार भर में
उनसे इतनी संगत है जुड़ पायी।

वो शांति, वो स्थिरता भीतर समा जाती है
परेशानी के समय में दिलासा दे पाती है
क्यूँकि जब तक हैं तन में प्राण
होते रहेंगे हमारे इम्तहान।

जो आए नन्हे से शिशु बन कर
वे बने गुरुजी महाराज
जिन्होंने कल तक ना जाना था उन्हें
उनमें से कई उन्हें जान चुके हैं आज
कल भी गुरुजी की कृपा से
उनसे जुड़ेंगे और भी जन
गुरुजी की शरण मिलने पर
संवरता है सबका जीवन।

आकाश से भी बड़ा है गुरुजी का आँचल
समस्त संसार रहा है इस आँचल में पल
संगत के अनगिनत कष्ट रहे हैं टल
सैंकड़ों की किस्मत रही है बदल।

ऐसे प्रतापी गुरुजी महाराज को नमन
बशर के रूप में आए स्वयं भगवन्
करने सारी संगत का उद्धार
ले जाने उन्हें भवसागर के पार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

भवसागर के पार (07/01/2026)

पावन आस (06/30/2026)

जून ३०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५४

                            पावन आस 

हम हैं इंसान
पाशों में हैं बँधे
माया और अविद्या से
हो जाते हैं अंधे…

कभी खींचती है हमें ख़ुशी
कभी निचोड़ लेता है गम
गुरुजी की याद में रहेंगे जितना ज़्यादा
ऐसे खिंचाव होंगे उतने ही कम
तभी तो पूरी तरह से
क्यों ना गुरुजी में जायेंगे रम।

फिर होगा वो एहसास
कि गुरुजी दूर नहीं, बल्कि हैं इतने पास
कि साँसों में समाये हैं
अस्तित्व पर यूँ छाये हैं
कि अपना तो कुछ है ही नहीं
बस गुरुजी हैं, बस गुरुजी ही।

इस दौरान आयेंगे उतार चढ़ाव
लेकिन जो निरंतर रहेगा गुरुजी की ओर बहाव
और जो उनके करीब होने का रहेगा चाव
तो गुरुजी की कृपा से फलित होगा हमारा भाव।

लालच की चट्टाने, पाप के पत्थर
और भी कई इम्तहान होंगे अक्सर
अगर भीगना है गुरुजी के आशीर्वाद में
तो इन सबके दौरान ज़रूरी है रहना गुरुजी की याद में।

इस याद में है वह अमृत
जो सींचेगा हमारे विश्वास को
जो ऊर्जा देगा हमारे प्रयास को
जो निखारेगा गुरु प्राप्ति की पावन आस को।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

पावन आस (06/30/2026)

शांत रहे जो भीतर से (06/29/2026)

जून २९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५३

                    शांत रहे जो भीतर से 

शांत रहे जो भीतर से
वो ना पीड़ित हो इस जहाँ के ज्वर से
वरना इस जहाँ में रहते रहते आजकल स्वाभाविक है अशांति
जो चुरा लेती है तन, मन, और रूह की भी कांति।

गुरुजी ने बख्शा है गुर्बानी का श्रवण और सिमरन
ये वो औषधि है जिससे शांत होता है मन
जिससे होता है भीतर का पवित्रीकरण
और सिमरते सिमरते होता है दुखों का हरण।

बेशक व्याकुल हो मन
और ध्यान ना लग पाये
तो भी भक्त गुरुजी की आज्ञा मान
सिमरन की कोशिश में बैठ जाये
तो भी वह इक कदम है
भीतर की शांति की ओर…

और कोशिश करते करते
जो जुड़ जाये गुरुजी के संग सीधी डोर
तो सिमरन होता जाएगा गहरा
जारी रहेगा गुरुजी का पहरा
मन में उमड़ती लहरें थमने लगेंगी
साँसों पर भी होगा अनुकूल प्रभाव
विचारों की तेज़ हवायें रुकने लगेंगी
मन को महसूस होगा ठहराव।

चल रहा है युग परिवर्तन
ऐसे में शांत रहे मन
ये है बहुत ज़रूरी ख़ुद के वास्ते
अगर तय करने हैं रूहानी रास्ते।

शांत मन से लाभ है रूह को भी और तन को
गुरुजी की कृपा से सम्भालो जीवन को
आज का सिमरन
मिटायेगा कई पुराने गम
कर्मों का बोझ करेगा कम
संवार देगा कई जनम।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

शांत रहे जो भीतर से (06/29/2026)

गुरुजी का बुलावा आता है जब (06/28/2026)

जून २८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५२

गुरुजी का बुलावा आता है जब

गुरुजी का बुलावा आता है जब
गुरुजी ही बनाते है रास्ता तब
उनका पहरा होता है हर कदम पर
वे ही तय कराते हैं सफ़र
और भक्त पहुँच पाता है उनके दर
सब है उनकी मेहर।

गुरुजी जानें भक्त का पिछला भी और आगे का
वे जानें रंग भक्ति के धागे का
जो भक्त की श्रद्धा पर होता है निर्भर
जिसकी गुरुजी को होती है ख़बर।

ये रिश्ता है पावन प्यार का
ना कि किसी व्यापार का
गुरुजी जानें किसका प्यार है कितना पवित्र
गुरुजी जानें हर भक्त का चरित्र।

लग जाते हैं कई जनम
पहुँचने गुरुजी के दर तक
वरना रूह का सफ़र तो चलता है अकथ
इतनी रूहें तो जाती हैं थक
जनम मरण से गुज़रते गुज़रते
ना जाने कितने शरीरों में रह कर
कर्मों की लहरों में बह कर
परमात्मा से कह कर
कि तमन्ना है उनमें समाने की
इच्छा है उन्हें पाने की।

इसलिए ये मौक़ा जो है मिला
कि गुरुजी की कृपा से नसीब है खिला
मिली है जो उनकी शरण
तो क्यों ना सुधार लें ये जनम
बहुत अच्छे नसीब वाले हैं
कि गुरुजी ने बुलाया है अपने दर पर
उनकी कृपा से सफल हो सबका सफ़र।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी का बुलावा आता है जब (06/28/2026)

मेरे खुदा (06/27/2026)

जून २७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५१

                              मेरे खुदा 

परम पूज्य गुरुजी महाराज मेरे
आपका शुक्र करूँ हर सवेरे
बख्शने के लिए ये साँसें और ये ज़िंदगी
बख़्शने के लिए अपनी शरण और बंदगी
बरस रही है आपकी मेहरबानी
बदल सी गई है ज़िंदगानी।

भाता है मुझे वही रास्ता
जहाँ रहे आपसे वास्ता
कोई और रास्ता रास ना आए
बेशक वो जहाँ भी जाये।

आपकी बातें सुनने और करने का करता है मन
कोशिश रहती है आपसे जुड़े रहने की हर क्षण
ना जाने मैं आपसे कह रही हूँ क्यों ये सब
जब कि जानती हूँ कि आप सब जानते हैं, मेरे रब
पर क्या करूँ, आपसे ही कहना चाहूँ, मेरे दिल में है आता जो भी ख़याल
आपसे ही साँझा करना चाहूँ, मेरे दिल में हो जो भी उलझन या सवाल।

मैं हूँ इतनी खुशनसीब
कि आपने आने दिया मुझे अपने करीब
दाता मेरे, आपकी कृपा के अमृत से धुल जायें मेरे पाप
आपकी दया की दवा से मिट जायें मेरे दुख संताप
मेरे नाथ भी आप, वैद्यनाथ हैं आप
मेरे भीतर भी आप, मेरे साथ हैं आप
आप देते हैं मुझे इसका एहसास
आपका शुक्रिया करे ये दास।

आपकी करुणा बिन
जीना नहीं मुमकिन
आपसे ये कहता है मेरा हर श्वास
आपसे ये कहता है मेरा विश्वास।

आपकी कृपा की किरणों से रहे मेरा जीवन नूरानी
मेरे घर परिवार की रक्षा करते हैं आप, आपकी मेहरबानी
सरताज मेरे, मुझसे हो जाये जो भी गुस्ताखी या नादानी
बख्श दीजियेगा मुझे, जान कर मुझे अपनी एक संगत निमानी।

जब यहाँ से हो जाऊँ विदा
तब भी ना कीजियेगा मुझे अपने से जुदा
अपनी करुणा के महासागर की बूँदें बरसाकर मुझ नाचीज़ पर
मुझे अपने में संजो लेना, मेरे खुदा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मेरे खुदा (06/27/2026)

गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर (06/26/2026)

जून २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५०

     गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर 

गाँव था इक प्यारा सा
वहाँ का स्पंदन था न्यारा सा
अक्सर वहाँ पर इक फ़क़ीर आता था
जो भी भिक्षा में मिलता था, वो खाता था
धन दौलत से वंचित था, पर रूहानियत में था अमीर
गुरुजी की दया से उनसे जुड़ा था फ़क़ीर।

रूहानियत के नूर से उज्जवल था फ़क़ीर का चेहरा
गुरुजी की मेहर का था उसपर चौबीसों घंटे पहरा
गुरुजी ने उसे बेफ़िक्र होकर जीना सिखाया
समर्पण का मार्ग दिखाया।

फ़क़ीर ने उनका हुक्म माना
उसे मीठा लगता था उनका भाणा
गुरुजी की प्रेरणा से चलता था उसका जीवन
गुरुजी और उनकी बातों में लीन रहता था उसका मन।

कुछ रोग उसे सताते थे
परंतु निराश ना होता था
कोई चिंता सताती भी थी
तो गुरुजी के ख़याल में खोता था।

मन ही मन तरसता था पाने के लिए उनके दर्शन
गुरुजी हुए उसकी भक्ति से प्रसन्न
आया फ़क़ीर के जीवन में वह क्षण
जब दर्शन देने आए भगवन।

फ़क़ीर एक बगिया में से रहा था गुज़र
उसे वहाँ दिखा एक बड़ा सा तरुवर
तरुवर के नीचे छाओं मैं
जुती पहने हुए पाओं में
फ़क़ीर ने देखा गुरुजी महाराज को
हैरान रह गया वो देखकर अपने सरताज को।

पहले तो उसे कुछ समझ ना आया
फिर वो दौड़ कर वहाँ आया
उसने चूम लिए गुरुजी के चरण
हुआ उसकी हर पीड़ा का हरण
गुरुजी ने उसे कहा, “ऐश कर”
धन्य हुआ फ़क़ीर पाकर ऐसा वर
फ़क़ीर गुरुजी के समक्ष नमन में झुका
जब उसने सिर उठाया तो आश्चर्यचकित होकर रुका
गुरुजी हो चुके थे अन्तर्धान
आख़िरकार, वे हैं भगवान
चलती है उनकी ही मर्ज़ी
भक्त तो केवल कर सकते हैं अर्ज़ी।

निरोगी हुए फ़क़ीर के रूह, तन, और मन
बेफिक्री में बीता उसका बाकी का भी जीवन
गुरुजी की बख़्शी हुई सादगी और सरलता से उसने जीवन लिया गुज़ार
बढ़ता रहा उसका गुरुजी के प्रति प्यार
शुक्राना के भाव में जीता रहा फ़क़ीर
टूटती गई उसकी रूह को बाँधने वाली हर ज़ंजीर
आख़िरी श्वास से भी करता रहा गुरुजी को स्मरण
गुरुजी की कृपा से सफल हुआ उसका जीवन
जब आया फ़क़ीर का यहाँ से जाने का समा
गुरुजी की आज्ञा से वह गुरुजी में गया समा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर (06/26/2026)