पावन आस (06/30/2026)

जून ३०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५४

                            पावन आस 

हम हैं इंसान
पाशों में हैं बँधे
माया और अविद्या से
हो जाते हैं अंधे…

कभी खींचती है हमें ख़ुशी
कभी निचोड़ लेता है गम
गुरुजी की याद में रहेंगे जितना ज़्यादा
ऐसे खिंचाव होंगे उतने ही कम
तभी तो पूरी तरह से
क्यों ना गुरुजी में जायेंगे रम।

फिर होगा वो एहसास
कि गुरुजी दूर नहीं, बल्कि हैं इतने पास
कि साँसों में समाये हैं
अस्तित्व पर यूँ छाये हैं
कि अपना तो कुछ है ही नहीं
बस गुरुजी हैं, बस गुरुजी ही।

इस दौरान आयेंगे उतार चढ़ाव
लेकिन जो निरंतर रहेगा गुरुजी की ओर बहाव
और जो उनके करीब होने का रहेगा चाव
तो गुरुजी की कृपा से फलित होगा हमारा भाव।

लालच की चट्टाने, पाप के पत्थर
और भी कई इम्तहान होंगे अक्सर
अगर भीगना है गुरुजी के आशीर्वाद में
तो इन सबके दौरान ज़रूरी है रहना गुरुजी की याद में।

इस याद में है वह अमृत
जो सींचेगा हमारे विश्वास को
जो ऊर्जा देगा हमारे प्रयास को
जो निखारेगा गुरु प्राप्ति की पावन आस को।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

पावन आस (06/30/2026)

शांत रहे जो भीतर से (06/29/2026)

जून २९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५३

                    शांत रहे जो भीतर से 

शांत रहे जो भीतर से
वो ना पीड़ित हो इस जहाँ के ज्वर से
वरना इस जहाँ में रहते रहते आजकल स्वाभाविक है अशांति
जो चुरा लेती है तन, मन, और रूह की भी कांति।

गुरुजी ने बख्शा है गुर्बानी का श्रवण और सिमरन
ये वो औषधि है जिससे शांत होता है मन
जिससे होता है भीतर का पवित्रीकरण
और सिमरते सिमरते होता है दुखों का हरण।

बेशक व्याकुल हो मन
और ध्यान ना लग पाये
तो भी भक्त गुरुजी की आज्ञा मान
सिमरन की कोशिश में बैठ जाये
तो भी वह इक कदम है
भीतर की शांति की ओर…

और कोशिश करते करते
जो जुड़ जाये गुरुजी के संग सीधी डोर
तो सिमरन होता जाएगा गहरा
जारी रहेगा गुरुजी का पहरा
मन में उमड़ती लहरें थमने लगेंगी
साँसों पर भी होगा अनुकूल प्रभाव
विचारों की तेज़ हवायें रुकने लगेंगी
मन को महसूस होगा ठहराव।

चल रहा है युग परिवर्तन
ऐसे में शांत रहे मन
ये है बहुत ज़रूरी ख़ुद के वास्ते
अगर तय करने हैं रूहानी रास्ते।

शांत मन से लाभ है रूह को भी और तन को
गुरुजी की कृपा से सम्भालो जीवन को
आज का सिमरन
मिटायेगा कई पुराने गम
कर्मों का बोझ करेगा कम
संवार देगा कई जनम।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

शांत रहे जो भीतर से (06/29/2026)

गुरुजी का बुलावा आता है जब (06/28/2026)

जून २८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५२

गुरुजी का बुलावा आता है जब

गुरुजी का बुलावा आता है जब
गुरुजी ही बनाते है रास्ता तब
उनका पहरा होता है हर कदम पर
वे ही तय कराते हैं सफ़र
और भक्त पहुँच पाता है उनके दर
सब है उनकी मेहर।

गुरुजी जानें भक्त का पिछला भी और आगे का
वे जानें रंग भक्ति के धागे का
जो भक्त की श्रद्धा पर होता है निर्भर
जिसकी गुरुजी को होती है ख़बर।

ये रिश्ता है पावन प्यार का
ना कि किसी व्यापार का
गुरुजी जानें किसका प्यार है कितना पवित्र
गुरुजी जानें हर भक्त का चरित्र।

लग जाते हैं कई जनम
पहुँचने गुरुजी के दर तक
वरना रूह का सफ़र तो चलता है अकथ
इतनी रूहें तो जाती हैं थक
जनम मरण से गुज़रते गुज़रते
ना जाने कितने शरीरों में रह कर
कर्मों की लहरों में बह कर
परमात्मा से कह कर
कि तमन्ना है उनमें समाने की
इच्छा है उन्हें पाने की।

इसलिए ये मौक़ा जो है मिला
कि गुरुजी की कृपा से नसीब है खिला
मिली है जो उनकी शरण
तो क्यों ना सुधार लें ये जनम
बहुत अच्छे नसीब वाले हैं
कि गुरुजी ने बुलाया है अपने दर पर
उनकी कृपा से सफल हो सबका सफ़र।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी का बुलावा आता है जब (06/28/2026)

मेरे खुदा (06/27/2026)

जून २७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५१

                              मेरे खुदा 

परम पूज्य गुरुजी महाराज मेरे
आपका शुक्र करूँ हर सवेरे
बख्शने के लिए ये साँसें और ये ज़िंदगी
बख़्शने के लिए अपनी शरण और बंदगी
बरस रही है आपकी मेहरबानी
बदल सी गई है ज़िंदगानी।

भाता है मुझे वही रास्ता
जहाँ रहे आपसे वास्ता
कोई और रास्ता रास ना आए
बेशक वो जहाँ भी जाये।

आपकी बातें सुनने और करने का करता है मन
कोशिश रहती है आपसे जुड़े रहने की हर क्षण
ना जाने मैं आपसे कह रही हूँ क्यों ये सब
जब कि जानती हूँ कि आप सब जानते हैं, मेरे रब
पर क्या करूँ, आपसे ही कहना चाहूँ, मेरे दिल में है आता जो भी ख़याल
आपसे ही साँझा करना चाहूँ, मेरे दिल में हो जो भी उलझन या सवाल।

मैं हूँ इतनी खुशनसीब
कि आपने आने दिया मुझे अपने करीब
दाता मेरे, आपकी कृपा के अमृत से धुल जायें मेरे पाप
आपकी दया की दवा से मिट जायें मेरे दुख संताप
मेरे नाथ भी आप, वैद्यनाथ हैं आप
मेरे भीतर भी आप, मेरे साथ हैं आप
आप देते हैं मुझे इसका एहसास
आपका शुक्रिया करे ये दास।

आपकी करुणा बिन
जीना नहीं मुमकिन
आपसे ये कहता है मेरा हर श्वास
आपसे ये कहता है मेरा विश्वास।

आपकी कृपा की किरणों से रहे मेरा जीवन नूरानी
मेरे घर परिवार की रक्षा करते हैं आप, आपकी मेहरबानी
सरताज मेरे, मुझसे हो जाये जो भी गुस्ताखी या नादानी
बख्श दीजियेगा मुझे, जान कर मुझे अपनी एक संगत निमानी।

जब यहाँ से हो जाऊँ विदा
तब भी ना कीजियेगा मुझे अपने से जुदा
अपनी करुणा के महासागर की बूँदें बरसाकर मुझ नाचीज़ पर
मुझे अपने में संजो लेना, मेरे खुदा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मेरे खुदा (06/27/2026)

गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर (06/26/2026)

जून २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०५०

     गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर 

गाँव था इक प्यारा सा
वहाँ का स्पंदन था न्यारा सा
अक्सर वहाँ पर इक फ़क़ीर आता था
जो भी भिक्षा में मिलता था, वो खाता था
धन दौलत से वंचित था, पर रूहानियत में था अमीर
गुरुजी की दया से उनसे जुड़ा था फ़क़ीर।

रूहानियत के नूर से उज्जवल था फ़क़ीर का चेहरा
गुरुजी की मेहर का था उसपर चौबीसों घंटे पहरा
गुरुजी ने उसे बेफ़िक्र होकर जीना सिखाया
समर्पण का मार्ग दिखाया।

फ़क़ीर ने उनका हुक्म माना
उसे मीठा लगता था उनका भाणा
गुरुजी की प्रेरणा से चलता था उसका जीवन
गुरुजी और उनकी बातों में लीन रहता था उसका मन।

कुछ रोग उसे सताते थे
परंतु निराश ना होता था
कोई चिंता सताती भी थी
तो गुरुजी के ख़याल में खोता था।

मन ही मन तरसता था पाने के लिए उनके दर्शन
गुरुजी हुए उसकी भक्ति से प्रसन्न
आया फ़क़ीर के जीवन में वह क्षण
जब दर्शन देने आए भगवन।

फ़क़ीर एक बगिया में से रहा था गुज़र
उसे वहाँ दिखा एक बड़ा सा तरुवर
तरुवर के नीचे छाओं मैं
जुती पहने हुए पाओं में
फ़क़ीर ने देखा गुरुजी महाराज को
हैरान रह गया वो देखकर अपने सरताज को।

पहले तो उसे कुछ समझ ना आया
फिर वो दौड़ कर वहाँ आया
उसने चूम लिए गुरुजी के चरण
हुआ उसकी हर पीड़ा का हरण
गुरुजी ने उसे कहा, “ऐश कर”
धन्य हुआ फ़क़ीर पाकर ऐसा वर
फ़क़ीर गुरुजी के समक्ष नमन में झुका
जब उसने सिर उठाया तो आश्चर्यचकित होकर रुका
गुरुजी हो चुके थे अन्तर्धान
आख़िरकार, वे हैं भगवान
चलती है उनकी ही मर्ज़ी
भक्त तो केवल कर सकते हैं अर्ज़ी।

निरोगी हुए फ़क़ीर के रूह, तन, और मन
बेफिक्री में बीता उसका बाकी का भी जीवन
गुरुजी की बख़्शी हुई सादगी और सरलता से उसने जीवन लिया गुज़ार
बढ़ता रहा उसका गुरुजी के प्रति प्यार
शुक्राना के भाव में जीता रहा फ़क़ीर
टूटती गई उसकी रूह को बाँधने वाली हर ज़ंजीर
आख़िरी श्वास से भी करता रहा गुरुजी को स्मरण
गुरुजी की कृपा से सफल हुआ उसका जीवन
जब आया फ़क़ीर का यहाँ से जाने का समा
गुरुजी की आज्ञा से वह गुरुजी में गया समा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी से जुड़ा फ़क़ीर (06/26/2026)

इच्छा थी… (06/25/2026)

जून २५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४९

               इच्छा थी…

इच्छा थी मिलने की रब को
जिन्होंने संभाला है सब को
गुरुजी ने बुलाया अपने दर पर
तो सुलझ गया सफ़र
जाना कि गुरुजी ही हैं रब
उनमें समायें हैं सब।

हर गुज़रते दिन के साथ
बढ़ता चला गुरुजी पर विश्वास
अब तो तीव्र होती जाती है
गुरुजी को पाने की आस।

मिटनी होगी हर दूरी
उनसे अपनी रूह की
अगर उनको पाना है
बाक़ी हर संबंध तो बेगाना है।

इसलिए उन्ही की प्राप्ति है सार्थक
जिसके लिए श्रद्धा चाहिए अथक
गुरुजी बख़्शते रहें वो श्रद्धा, वो विश्वास
जिससे मेरी रूह होती जाये उनके पास
फिर उन्ही की कृपा से एक दिन ऐसा आयेगा
जब उनकी प्राप्ति से नसीब खिल जाएगा।

अक्सर लंबा लगता है इंतज़ार
पर मिला है कोशिश का मौक़ा इस बार
तो इंतज़ार भी है जैसे इक आशीर्वाद
जिसके मुकम्मल होने पर रूह करेगी इंतज़ार का भी धन्यवाद
और धन्यवाद हर उस प्रभाव को
और हर उस अभाव को
जो बने कारण इस कशिश में
और इस कोशिश में।

इस प्रेरणा के लिए भी शुक्राना गुरुजी महाराज का
शुक्राना बीते कल का और शुक्राना आज का
शुक्राना कि मैं इस ख्वाहिश को कर पा रही हूँ बयाँ
जानती हूँ गुरुजी जानते हैं, वे स्वयं ही तो हैं परमात्मा।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

इच्छा थी… (06/25/2026)

गुरुजी के होकर जियो (06/24/2026)

जून २४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४८

      गुरुजी के होकर जियो 

गुरुजी की महिमा गाते हुए जियो
मुश्किल भी लगे तो भी
कोशिश करो मुस्कुराते हुए जियो
गुरुजी के सत्संग तो औषधि हैं
उनके सत्संग सुनते और सुनाते हुए जियो
गुरुजी स्वयं भगवान हैं
सभी को ये बताते हुए जियो।

इसमें है मंगल और कल्याण
जो करते हैं गुरुवर करुणानिधान
क्यूँकि अनोखी और अद्भुत है लीला उनकी
संगत दीवानी हो जाती है उनके नाम की धुन की।

यूँ ही तो नहीं हर देश, हर प्रांत में
भीड़ में और एकांत में
हो रहे हैं गुरुजी महाराज के सत्संग
और गहरा हो रहा है भक्ति का रंग।

सादगी और सरलता
प्रेम और निर्मलता
गुरुजी को करे प्रसन्न
शांत हो भक्त का भी मन।

ना कोई कर्मकांड, ना हवन
ना पंडित, ना मंत्र
भक्त का सीधा नाता गुरुजी से
बिना किसी यंत्र या तंत्र।

गुरुजी से दिल की बात हो
गुरुजी से ही वार्तालाप सीधी रूहानी तार द्वारा
दिखावे की ज़रूरत नहीं है
गुरुजी में संलग्न हो संगत का चित्त सारा।

गुरुजी के बख़्शे सेवा, सत्संग, और सिमरन
इनसे पावन कर लो अपनी रूह और अपना मन
जियो बिना किसी भय के
बिना किसी संशय के
क्यूँकि गुरुजी सदा हैं अंग संग
निखारते हुए तुम्हारा रंग
बाहर से और भीतर से
अपने प्रताप के नूरानी असर से
उनके रंग में रंगकर जियो
तुम गुरुजी के होकर जियो।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी के होकर जियो (06/24/2026)

मेरे हर श्वास का शुक्राना (06/23/2026)

जून २३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४७

   मेरे हर श्वास का शुक्राना 

मेरे हर श्वास का शुक्राना
हर श्वास में बसे विश्वास का शुक्राना
गुरुजी, मुझे जितनी भी बार पड़े यहाँ से आना जाना
मुझे आपके चरणों में मिले ठिकाना।

आपसे हुआ है बेइंतहा प्यार
लफ़्ज़ों में बयान ना कर पाऊँ
आपकी शरण में हर जन्म लूँ गुज़ार
आपकी शरण में जीयूँ और मर जाऊँ।

ये प्यार बढ़ता रहे आपकी मेहर से
जागते ही कहती हूँ मैं ये हर सहर से
रात में आपके ख़यालों में खो जाती हूँ
चाँद और तारे ही जानें मैं कब सो जाती हूँ।

और जब कभी आप देते हैं स्वप्न दर्शन
तब होती हूँ यूँ आप में मगन
कि नींद खुले तो जी करता है कि फिर सो जाऊँ
और आपके स्वप्न दर्शन में फिर से खो जाऊँ।

कभी अपने पर हँसी आती है
तो कभी होती है ख़ुद पर हैरानी
कि आपकी लीला में क्या है ऐसा
कि आपकी दीवानी हुई ये निमानी।

फिर मुझे आता है याद
कि मेरी नहीं औक़ात
आपकी लीला को समझ पाने की
आपकी माया में सुलझ जाने की।

लीलाधारी मायापति सदाशिव हैं आप
और मैं इक बाँवरी सी दासी
सदा आपके प्यार की प्यासी
जिसे आपने इतनी बख़्शीशों हैं नवाज़ी।

मुझे मेरे रोम रोम में आपकी दिव्यता का होता रहे एहसास
कृपा कर कराइये मुझे इस ओर प्रयास
रम जाऊँ यूँ मैं आप में, मेरे परम पूज्य गुरुजी महाराज
कि सदा के लिए सुरति आपसे जुड़ जाये, मेरे सरताज।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मेरे हर श्वास का शुक्राना (06/23/2026)

ना कोई पर्दा ना दीवार (06/22/2026)

जून २२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४६

      ना कोई पर्दा ना दीवार

ना कोई पर्दा ना दीवार
ना कोई गुरुजी के और तुम्हारे दरमियान
कह दो उनसे दिल की बात
कर दो जो भी भाव करना है बयान।

गुरुजी सुनते हैं और जानते हैं
गुरुजी देखते हैं और पहचानते हैं
तुम्हारी श्रद्धा, तुम्हारा प्यार
तुम्हारी मेहनत, तुम्हारा ऐतबार।

गुरुजी की नदर ना होती तुम पर
तो तुम जी ना रहे होते इस क़दर
ना झेल पा रहे होते मुश्किलों के तूफ़ान
तुम्हें हिम्मत दे रहे हैं गुरुजी मेहरबान।

हर ख़ुशी हर गम में
गुरुजी होते हैं भक्तों के अंग संग
उन्ही की कृपा से ही दिखता है
दुनिया का असली रंग।

ना छूटे कभी भी गुरुजी से लागी है जो लगन
इस आरज़ू को बसा कर खिला लो तुम अपना मन
हर श्वास का सहारा हैं गुरुजी के चरण
उनकी कृपा से ही संवर रहा है तुम्हारा जीवन।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ना कोई पर्दा ना दीवार (06/22/2026)

निर्मल नाथ मेरे (06/21/2026)

जून २१, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०४५

                        निर्मल नाथ मेरे 

निर्मल नाथ मेरे
सदा साथ हैं मेरे
मैं जहाँ भी जाती हूँ
उनकी मौजूदगी पाती हूँ…

कभी ख़ुशबू उनकी
कभी श्रुति जाप की धुन की
कभी अमृत उनके चरण में
उनका सिमरन मेरे मन में…

उनका होना विराजमान हर सत्संग में
उनकी लीला प्रकृति के हर रंग में
स्वरूप उनके सभी इतने दिव्य और खूबसूरत
दिल में बसी हुई उनकी मोहिनी मूरत
उनका मेरे जीवन में मार्गदर्शन
उनकी याद मेरे हृदय में हर क्षण
भोजन के हर निवाले में उनकी दी औषधि
चाय प्रसाद की हर बूंद में बख़्शीश उनकी दी…

गुरुजी की मौजूदगी से ही हर प्रेरणा और निर्णय
उन्ही के होने से मैं हूँ निर्भय
मुझ में चेतना के रूप में भी गुरुजी ही बसते हैं
मुझे हर ख़ुशी देते हैं गुरुजी और स्वयं भी हँसते हैं
उनका गंभीर चेहरा देखती हूँ जब मैं दुविधा में होती हूँ
जब स्वप्न दर्शन देते हैं तो भी मैं उनमें खोती हूँ…

वे मौजूद होते हैं वहाँ
अपनी सेवा बख़्शते हैं जहाँ
उनके होने से ही तो है हर समा
उनके होने से ही तो है मेरा आशियाँ…

हर तरफ़ गुरुजी ही गुरुजी आते हैं नज़र
धरती पर महसूस कराते हैं वे सचखंड का दर
अपने मंदिर और दरबार में
निहाल किया है उन्होंने अपने प्यार में
उनके अंग-संग होने का खास है एहसास
जो उनकी कृपा से निखारता है मेरा उनपर विश्वास…

जो चलाते हैं मुझे मेरा हाथ थाम कर
वारी जाऊँ मैं उन गुरुजी, उन नाथ पर
उनकी रहमत से हूँ सलामत मैं और मेरा सफ़र
जिसके नाथ हों गुरुजी, उसे काहे का डर?

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

निर्मल नाथ मेरे (06/21/2026)