अनुग्रह की मीठी छाओं तले (10/17/2026)

अक्तूबर १७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१६३

                                                                                                   अनुग्रह की मीठी छाओं तले 

गुरुजी की रूहानी ख़ुशबू
सुगन्ध है उनकी ऊर्जा की
उनके आशीर्वाद की
उनकी प्रेम भरी याद की।

जो शिवत्व हैं स्वयं
जो हरते हैं संगत के गम
जो ख़ुद हैं परब्रह्म
उन्होंने लिया है तुम्हें अपनी शरण।

तुम्हारा तो खिल गया जीवन
जी पूरण गुरु की मिली शरण
करुणामयी हैं उनके कोमल कमल चरण
उन्हें समर्पित कर दो तुम अपना अंत:करण।

गुरुजी जानते हैं हर बात तुम्हारे मन की
एक उन्हें ही खबर है तुम्हारे हर पिछले जनम की
कर्मों के गणित के मालिक हैं गुरुजी करुणानिधान
गुरु के रूप में हैं न्यायाधीश और भगवान।

सच में धन्य जो तुम
कि गुरुजी में हो रहे हो गुम
अपने को उनमें खोकर तुम जाओगे तर
तुम्हारे जीवन में रोशनी की किरणें जायेंगी बिखर
उनकी कृपा से करते रहोगे तुम उनके चरणों में जीवन बसर
उनके अनुग्रह की मीठी छाओं तले ये सफ़र जाएगा गुज़र।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

अनुग्रह की मीठी छाओं तले (10/17/2026)

ख़यालों का ख़ज़ाना (10/16/2026)

अक्तूबर १६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१६२

              ख़यालों का ख़ज़ाना 

प्रकृति ने बख्शा प्राणियों को इक और नया दिन
नज़ारे थे भिन्न भिन्न
पत्तों पर छायी थी हरियाली
हवा की अदा थी मतवाली
फूल सुगंधित थे महक से
पंछी ख़ुश थे चहक के
निखरा हुआ था पेड़ों का रूप
दिख रही थी मीठी मीठी धूप
आसमान में चल रही थी बादल और सूरज की छुपन छुपायी
पूरे वातावरण में अद्भुत सुंदरता थी समायी।

सैर के लिए घर से निकला जन
किसी उलझन में था उसका मन
मन में चल रहा था गुरुजी का चिंतन
चलते चलते होने लगा गुरुजी के ख़यालों में मगन।

घर के आसपास की सड़कों से
उसने इतने मोड़ ले लिए और उसे पता ना चला
गुरुजी की याद में विलीन था इतना कि दिन गुज़र गया
उसे एहसास हुआ जब सूरज ढला।

लेकिन इतने पल जो उसे मिले गुरुजी के चिंतन के
वे लाए उपाय उसकी उलझन के
गुरुजी ने उसे दिए ऐसे संकेत
जो बन गए मूल उसकी सुलझन के।

जन चलने लगा अपने घर की ओर
अब प्रकृति के नज़ारे थे कुछ और
चाँद दिखने लगा था आसमान में
तारे रहे थे टिमटिमा
देख कर अपने गिरेबान में
उसने अपना सिर दिया झुका।

करते हुए गुरुजी का शुक्राना
घर पहुँचा वह जन दीवाना
उलझन तो शायद बनी इक बहाना
दरअसल एकत्रित किया उसने गुरुजी के ख़यालों का ख़ज़ाना।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ख़यालों का ख़ज़ाना (10/16/2026)

आने वाले कल का शुभागमन (10/15/2026)

अक्तूबर १५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१६१

                                 आने वाले कल का शुभागमन 

जैसे जैसे रहा है गुज़र
तुम्हारी ज़िंदगी का ये सफ़र
हर परिवर्तन का होगा असर
क्यूँकि गुरुजी कर रहे हैं मेहर।

तुम्हारी ज़िंदगी में कई अपने छूट रहे हैं पीछे
ताकि तुम ना गिरो नीचे
क्यूँकि गुरुजी तुम्हें आगे बढ़ा रहे हैं
रूहानी उन्नति का रास्ता दिखा रहे हैं।

इसलिए तुम उदास ना हो जाना कहीं
पीछे लौट कर ना खो जाना वहीं
जहाँ से गुरुजी ने तुम्हें दूर किया है
क्यूँकि उन्होंने तुम पर बहुत उपकार किया है।

आगे के रास्ते में अकेले भी पाओ ख़ुद को
तो बिल्कुल गम ना करना
कोई क्या सोचेगा या क्या कहेगा
इन बातों से ना डरना।

गुरुजी के संग अपने रिश्ते को गहरा करते जाओ
उनसे सीधी तार जोड़कर उनकी ओर बढ़ते जाओ
गुरुजी को प्रसन्न करने की कोशिश में रहो निरंतर
पार होता चलेगा इस भवसागर का समुंदर।

जो पीछे छूटा, वह था तुम्हारा अतीत
और इस से पहले कि वर्तमान भी जाये बीत
तुम हर पल समर्पित कर दो गुरुजी महाराज को
आने वाले कल का शुभागमन करने दो अपने आज को।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

आने वाले कल का शुभागमन (10/15/2026)

आसरा गुरुजी महाराज का (10/14/2026)

अक्तूबर १४, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१६०

                              आसरा गुरुजी महाराज का

आसरा गुरुजी महाराज का जो मिला है
तो कोई और दरवाज़ा ना खटखटाना
गुरुजी की याद में रहना
कोई बहाना ना बनाना।

गुरुजी सृजनहार हैं
वे ही पालनहार भी
वे ही तारनहार हैं
वे ही बख़्शनहार भी।

गुरुजी हैं ज्योत दिव्य
वे स्वयं हैं सदाशिव
उनमें सभी देवी देवता हैं समाये
उनकी शरण में जो भी आए
उसका उद्धार निश्चित है आज या कल
गुरुजी की कृपा से उसके कष्ट जाते हैं टल।

ये है प्रेमभक्ति का सफ़र
जिसके दौरान बरसती है गुरुजी की मेहर
जाता है वो सँवर जिसपर होती है उनकी नदर
कुछ ऐसा प्यारा सा होता है असर।

अब जो चल पड़े हो गुरुजी के दिखाये रास्ते पर
तो पीछे ना मुड़ना
गुरुजी की कृपा ना होती
तो तुमने उनसे नहीं था जुड़ना
इसलिए स्वयं को ख़ुशक़िस्मत जानो
गुरुजी को और गुरुजी की मानो
वे लिख रहे हैं तुम्हारे नसीब में अनोखी दास्तान
वे अपने हर भक्त पर होते हैं मेहरबान।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

आसरा गुरुजी महाराज का (10/14/2026)

कभी कभी… (10/13/2026)

अक्तूबर १३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५९

                                   कभी कभी…

कभी कभी इतना परेशान होता है दिल
कि गुरुजी को अपने मुख से कहना भी लगता है मुश्किल
लेकिन गुरुजी तो जान जाते हैं हमारे बोले बिन
बेशक विचार हो एक या हों भिन्न भिन्न।

बैठ जायें उनकी याद में
या देखें उनके स्वरूप की ओर
उनके सत्संग सुनें
या करें गुरबानी पर गौर।

कर लें उनका मंत्र जाप
या केवल ले लें उनका नाम
दिल यकीनन महसूस करेगा राहत
चाहे पूरी हो या ना हो चाहत।

अंतर्यामी महाराज से, सर्वज्ञानी सरताज से
कुछ छुप नहीं सकता
जो जुड़ गया है उनसे
उसे ये है पता।

और शुक्र है कि वे जानते हैं सब
और वे ही जानते हैं कब
होना है किसका कैसा कल्याण
और भक्त के इम्तहान का क्या होगा परिणाम।

इसलिए उन्ही पर सब छोड़ने में है भलाई
क्योंकि गुरुजी ही जानें अपनी गुरुयायी
किसी इंसान को कभी उनकी लीला ना समझ आ पायी
उनकी वड्डीयायी ने सदा हर संगत पर रहमतें हैं बरसायी।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

कभी कभी… (10/13/2026)

तू धीर है… (10/12/2026)

अक्तूबर १२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५८

                             तू धीर है…

तू धीर है
तू वीर है
तू फ़क़ीर है
पर अमीर है।

तूने पाया है
सृष्टि में साथ सबसे अनमोल
जब गुरुजी ने तुझे स्वीकारा
उन्होंने तेरे लिए अपना द्वार दिया खोल।

ये कोई मामूली बात नहीं है प्यारे
खिल गए हैं तेरी क़िस्मत के सितारे
ये द्वार है सचखंड का
आनंद, निर्मल और अखंड का
प्रेम का पुंज
कल्याण का कुंज।

तू है गुरुजी महाराज के चरण में
ब्रह्माण्डों के शहंशाह की शरण में
मग्न उनमें होकर तू चलता चल
बेफिक्र होकर कि क्या होगा कल।

तेरे चेहरे की चमक
तेरे साँसों की महक
स्पष्ट संकेत है गुरुजी के आशीर्वाद का
तू पात्र है गुरु प्रसाद का।

गुरुजी ने थामी है तेरे जीवन की डोर
तू फ़क़ीरी में चल जिस भी ओर
वे ना होने देंगे तुझे गुमराह
कम ना करना तू भक्ति का उत्साह।

तेरी फ़क़ीरी को सलाम
तेरी दीवानगी को प्रणाम
तू पहुँचेगा गुरुजी के धाम
लेता चल बस उनका नाम।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तू धीर है… (10/12/2026)

भीतर भी भोर (10/11/2026)

अक्तूबर ११, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५७

                                   भीतर भी भोर 

रोशनी तक पहुँचने के लिए
यात्रा पूरी करनी होगी अंधकार की
वरना अंधकार में ही रह जाओगे
तो गुरुजी को कैसे पाओगे?

हर आवरण का उतरना ज़रूरी है
बेशक वो हो कर्म का या मल का
ख़त्म करनी है गुरुजी से जो भी दूरी है
तो उनसे जुड़े रहने का प्रयास होना होगा हर पल का।

भक्ति में प्रेम, और प्रेम में भक्ति
इसमें है गुरुजी को आकर्षित करने की शक्ति
हो इसके काबिल तुम
ना हो जाओ प्रपंच में गुम
गुरुजी से जुड़े रहने की कोशिश करते रहो हर क्षण
करो उनकी सेवा, करो उनका चिंतन
उनकी मानस पूजा करो
उनके सत्संग में जुड़ो।

अंधकार की यात्रा चलेगी कब तक
ये तुम ना जानो
लेकिन रोशनी तक पहुँचोगे ज़रूर
बस, गुरुजी का कहा मानो।

परब्रह्म परमेश्वर हैं वे
रूहानी रोशनी हैं वे स्वयं
उनकी कृपा से होगा तुम्हें उनका साक्षात्कार
उनकी मेहर से पीछे छूट जाएगा अंधकार
रोशनी ही रोशनी होगी हर ओर
हो जाएगी भीतर भी भोर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

भीतर भी भोर (10/11/2026)

…अब की बार (10/09/2026)

अक्तूबर ९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५५

                               …अब की बार 

छुपी तेरी मौन मुस्कुराहट में
गम की जो आहट है
उसे सुन रहे हैं गुरुजी महाराज
उनसे ना छिपा कोई राज़।

तू बेशक ना कह पाये उनसे
वे जानते हैं सब
तेरी हर सोच, हर तमन्ना
और तू क्या करता है कब।

शामिल है उनकी बख्शीश
शामिल है उनका आशीष
हैं वे तेरे साथ
थामे तेरा हाथ
तेरी ज़िंदगी के सफ़र के हर कदम पर
इसलिए तू अकेले होने का ना गम कर।

इसमें नहीं है संशय
कि रुकता नहीं है समय
बेशक लंबा लग रहा है इंतज़ार
तू मान ना लेना हार
तेरे अंग संग हैं गुरु सरकार
ज़रूर दूर होगा जीवन का अंधकार
रोशनी कर रही है तेरा इंतज़ार अब की बार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

…अब की बार (10/09/2026)

रास्ता लग रहा था संगीन (10/08/2026)

अक्तूबर ८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५४

                                 रास्ता लग रहा था संगीन 

रास्ता लग रहा था संगीन
मन का भाव हुआ था दीन
मुसाफ़िर को महसूस हो रही थी थकान
ज़िंदगी लगने लगी थी उसे चट्टान
कैसे जीये? क्या करे?
सोच रहा था डरे डरे।

ऐसी मुश्किल आन पड़ी थी
जिसकी कभी कल्पना भी ना की थी
उदास सा था उसका मन
आँखें भी उसकी रो रहीं थी।

चलते चलते उसे राह में दिखी इक कुटीर
भीतर जाने के लिए हुआ वह अधीर
बनकर एक फ़क़ीर
नैनों में भरे नीर
वह गया भीतर उत्सुक होकर
बैठे थे दो जन ध्यान में खोकर
इक साधारण से आसन के समक्ष
उसे कोई आसन पर ना दिखा प्रत्यक्ष।

देखी उसने इक पुरानी सी चौकी पर
इक दिव्य पुरुष की छोटी सी तस्वीर
उनके आगे थी ज्योत उज्ज्वल
मुसाफ़िर आश्चर्य में था उस पल।

“ब्लेसिंग्स ऑलवेज, गुरुजी”
तस्वीर पर लिखा था
ध्यान से देखने पर
मुसाफ़िर को दिखा था।

वे जन कर रहे थे होठों से जाप
“ओम नमः शिवाय, शिवजी सदा सहाय” कह रहे थे
मुसाफ़िर के आने पर भी वे जाप करते रहे
कुछ पलों में उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

मुसाफ़िर को गुरुजी ने आसन पर दिए दर्शन
तस्वीर के द्वारा उसने पहचान लिया उसी क्षण
अब तो वह भी करने लगा वही जाप
पहले मुश्किल लगा, फिर तो होने लगा अपने आप।

उनसे गुरुजी की महिमा सुनी मुसाफ़िर ने
गुरुजी की ओर हुआ आकर्षित
बाद में इक जन ने दिया उसे अमृत
दूजे ने दिया हलवा प्रसाद
मुसाफ़िर धन्य हुआ
पाकर गुरुजी का आशीर्वाद।

इसके बाद तो क्या कहना था
गुरुजी की धुन में ही रहना था
गुरुजी उसे सफ़र में बढ़ाते चले
अपने क़रीब लाते चले।

रास्ता हुआ रूहानियत से रंगीन
दिखने लगी मंज़िल हसीन
बेशक लग रही थी दूर
लेकिन ठान लिया कि चलना है ज़रूर
उसी ओर
थामे भक्ति की डोर
गुरुजी के संग
होकर उनमें मलंग।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

रास्ता लग रहा था संगीन (10/08/2026)

ज़िन्दगी के अनुभव (10/07/2026)

अक्तूबर ७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१५३

                                ज़िन्दगी के अनुभव 

हर वो भक्त जो गुरुजी की शरण में है
उसकी ज़िंदगी का कोई अनुभव गुरुजी की मर्ज़ी के बिन हो सकता नहीं
अनुभव सुखद हो या नहीं
उस समय उसके लिए वही है सही।

क्यूँकि गुरुजी सर्वज्ञानी हैं
वे अंतर्यामी हैं
वे ही जानें हमारा अतीत
और हमारा वर्तमान कैसे रहा है बीत
किए हैं हमने कौनसे करम
निभा रहे हैं या नहीं हम अपना धर्म
यानी कि अपना फ़र्ज़
और किसका है हम पर क़र्ज़…

हर अनुभव कुछ दिखाता है
हर अनुभव कुछ सिखाता है
सभी अनुभव इम्तहान हैं होते
कुछ में हम अपने पाप हैं धोते
कुछ में हो कर्मों का क़र्ज़ अदा
हमारी हर प्रतिक्रिया पर भी गुरुजी की नज़र होती है सदा।

गुरुजी ऐसी सुमत बख़्शते रहें
कि हमारे विचार शुद्धि की ओर बहें
जिस भी कारणवश हो रहा है अनुभव प्रत्येक
गुरुजी जानते हैं कारण एक है या हैं अनेक
उन्ही की कृपा से हर अनुभव द्वारा भी हम कर सकते हैं उन्हें प्रसन्न
वे मेहर करें कि हर अनुभव के दौरान उनसे जुड़ा रहे हमारा मन।

लेकर गुरुजी की याद और उनके जप का सहारा
जी लें हर अनुभव को उनका नाम अमृत पीकर
गलतियाँ करने से हम बचे रहें और की हुई गलतियों से सीखें
ताकि उन्ही गलतियों को ना दोहरायें
हर अनुभव को गुरुजी का शुक्राना करते हुए जियें
और गुरुजी के करीब होते जायें।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ज़िन्दगी के अनुभव (10/07/2026)