चुनाव (05/16/2026)

मई १६,२०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००९

                              चुनाव 

जीवन है माया का मंच
इसलिए यहाँ जारी रहेगा प्रपंच
हमें करना होगा चुनाव
की हमें किस बात का है चाव।

बातें जो बढ़ायें गुरुजी से प्यार
या जिनसे और भी अच्छा लगे संसार?
बातें जो हों जुड़ी गुरुजी की याद से
या फिर केवल धन, भीड़, घूमने फिरने और जायदाद से?

दरअसल जीते हुए इस जीवन को
भोग का अनुभव कराते हुए तन और मन को
हर कदम पर है हमारे लिए अवसर
कि किस दिशा में ले जाना है सफ़र
क्या व्यर्थ में करना है साँसों का खर्चा?
कर के प्रपंच की चर्चा?
या जिन्होंने दिया है हमें हर श्वास
उन्हें याद करते रहने का करना है प्रयास।

किस ओर कराना है बहाव मन का
ये दायित्व है स्वयं हर जन का
क्योंकि आकर्षण और विकर्षण तो हैं अनेक
और मन को मोहित करता है इनमें से प्रत्येक।

गुरुजी और उनकी याद
जब करती चलेगी मन को आबाद
तो मन में होगा उनके प्रति प्रेम भाव
और मन करेगा अनुकूल चुनाव।

गुरुजी के नाम में रह कर मगन
लगा कर उनके जाप में लगन
उनके प्रेम से परिपूर्ण रहता है जीवन
किसी विकर्षण से विचलित नहीं होता मन।

मन पर इतना पक्का रहे गुरुजी के नाम का रंग
कि बाहरी प्रभाव से उन्मत होकर ध्यान ना हो भंग
भीतर से हों पूरी तरह से गुरुजी से जुड़े हुए बेशक हों जहाँ भी
तो गुरुजी की धुन में मलंग रहेंगे यहाँ भी और वहाँ भी।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

चुनाव (05/16/2026)

…अब तो जाग (05/15/2026)

मई १५,२०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००८

             …अब तो जाग 

ए मानव, तू हर पहर
घोलता है कर्मों में आसक्ति का ज़हर
अपनी सोच में लाता है अहंकार
कैसे होगा तेरा उद्धार?

पंचभूत से बना तेरा शरीर
पंचभूत में ही समा जाएगा
अहंकार और आसक्ति लेकर
जाएगा तो कहाँ जाएगा?

गुरुजी महाराज का दिखाया रास्ता
करेगा तेरी सहायता
मिट जायेंगे अहंकार और आसक्ति
जैसे जैसे गहरी होगी भक्ति।

इस रास्ते पर है ऐसा अमृत
जो अहंकार और आसक्ति के विष को कर देगा शक्तिहीन
गुरुजी चाहते हैं भक्तों का हित
इसलिए तू ये अमृत ग्रहण कर बन कर उनका दास दीन।

गुरुजी हैं कृपालु करुणामय दीनदयाल
उनके भरोसे आज़ाद हो, छोड़कर अहंकार और आसक्ति का जाल
देखना तू अपने सुख और संतोष को बढ़ते हुए
देखना स्वयं को रूहानी सीढ़ी चढ़ते हुए।

भक्ति की गहराई
रूहानियत की ऊँचाई
ये उसके नसीब में आई
जिसने त्यागी अहंकार और आसक्ति की परछायी
वरना ये परछायी ही अंधेरे का कारण जाती है बन
और इसकी वजह से कमज़ोर होता जाता है मन
कमज़ोर मन बाधा है भक्ति के रास्ते पर
रोक लेता है ये मुक्ति की ओर का सफ़र।

गुरुजी से माँगता है तू अपना कल्याण
तू भी दे अपनी ओर से पूरा योगदान
अहंकार और आसक्ति को त्याग
बहुत सो चुका, अब तो जाग।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

…अब तो जाग (05/15/2026)

नदिया दीवानी (05/14/2026)

मई १४,२०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००७

           नदिया दीवानी 

शांत बहती नदिया दीवानी
फिर पत्थर से टकरायी वो निमानी
काँप सा गया उसका पानी
हो गई उसे परेशानी।

फिर उसे याद आई अपनी नादानी
कि वह गुरुजी की याद से हो गई थी अनजानी
अपनी नादानी पर उसे हुई हैरानी
क्यूँकि वह हुई थी गुरुजी के नाम से बेगानी।

उसने मन ही मन माँगी गुरुजी से क्षमा
अर्जी की कि वे संभालें उसका समा
जानती थी कि स्वाभाविक है पत्थरों का रास्ते में आना
उसने गुरुजी से अरदास की कि मीठा लगे उसे उनका भाणा।

कहते कहते, इस से पहले की उसके आँसू बहते
गुरुजी महाराज ने सुन ली नादिया की अरदास
और बख्शी उसे ऐसी हिम्मत और ऐसा मनोबल
कि उसकी परेशानी गई टल।

नादिया की राहों में पत्थर रहे आते जाते
पर नादिया में थी इक अद्भुत सी शक्ति
क्यूँकि गहरी हो चुकी थी उसकी गुरुजी के प्रति भक्ति
और वो बन गई थी हर पत्थर को बिन परेशानी पार करने की युक्ति।

बीते अनेकों साल
परेशान ना हुआ नदिया का हाल
वो बहती रही व्यस्त होकर
गुरुजी की याद में मस्त होकर
फिर वक़्त आया सागर में समाने का
तो मोल समझ आया गुरु नाम के ख़ज़ाने का
क्यूँकि गुरुजी के नाम के सागर में वो समायी
गुरुजी में समायी जब यहाँ से हुई उसकी विदायी।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

नदिया दीवानी (05/14/2026)

वे ही राखा मेरे, वे ही रब (05/13/2026)

मई १३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००६

                 वे ही राखा मेरे, वे ही रब 

ना कोई कर्मकांड ना रिवाज़ ना रीत
निभानी है गुरुजी संग पावन प्यार की रीत
भोला भाव हमारा
गुरुजी को लागे प्यारा
और उनका प्यार प्यारा
है हमारा सलोना सहारा।

उनकी याद में रहना
उनके प्रेम में बहना
उन्ही को दिल की बात कहना
पहनना उनके नाम का गहना
जीना उनकी भक्ति में
रख भरोसा उनकी शक्ति में
कर के उन्हें अपना हर कर्म समर्पित
कर उनकी महिमा का गुणगान नित नित
बीत जाये ये ज़िंदगी
तो रास आएगी बंदगी
और मिल जाये उनकी बख़्शिंदगी
तो दूर हो जाये शर्मिंदगी
उनके चरणों में कर गलतियों का प्रायश्चित
हल्का कर के अपना चित्त
उनकी शरण में ही हो जीना मरना
इसके लिए जो भी हो मुझे करना
वे करायें गुरुजी महाराज मेरे
जब तक लूँ जन्म मरण के फेरे
क्यूँकि उन्हें ही सौंप दिया है सब
वे ही राखा मेरे, वे ही रब।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

वे ही राखा मेरे, वे ही रब (05/13/2026)

तू ना घबरा, बस, चलता जा (05/12/2026)

मई १२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००५

                तू ना घबरा, बस, चलता जा

मंज़िल खूबसूरत होगी
ओ मुसाफ़िर, तू ना घबरा
राहों में बेशक पत्थर हैं
तू चलता जा, तू चलता जा।

अरे, ये पत्थर तो और भी ज़्यादा थे
और थे भी बड़े बड़े
लेकिन तेरे गुरुजी महाराज आए
और इन राहों पर हुए खड़े
इतने पत्थर तो समा गए पृथ्वी में गुरुजी की एक नज़र से
और बाक़ी पत्थर छोटे हो गए उनकी नज़र के असर से।

अब जो बचे कुचे हैं पत्थर
तेरी इन राहों में
गुरुजी तुझे पार करायेंगे
लेकर अपनी बाहों में।

तुझे बेशक उनकी बाहें दिखेंगी नहीं
लेकिन देखना, वे तुझे ले चलेंगी वहीं
जहाँ खूबसूरत मंज़िल कर रही है तेरा इंतज़ार
तेरी हर मुश्किल के पार।

गुरुजी पर क़ायम रख अपना विश्वास
तू तो सदा से रहा है बनकर उनका दास
जब जब तेरे आंसू हैं छलके
नम हो जाती हैं गुरुजी की पलकें
वे करते हैं तुझसे बेहद प्यार
इसलिए आया है ये इंतज़ार
तुझे रिहा करने तेरे प्रारब्ध के भार से
तुझे बचाने काल के वार से
तुझपर गुरुजी की कृपा विशेष है
अब थोड़ा ही रास्ता शेष है
तू ना घबरा, तू चलता जा
तू ना घबरा, बस, चलता जा।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तू ना घबरा, बस, चलता जा (05/12/2026)

दया के महासिंधु (05/11/2026)

मई ११, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००४

                       दया के महासिंधु

दया के महासिंधु हैं मेरे गुरुजी महाराज
सारी की सारी सृष्टि में सबसे सुंदर हैं मेरे सरताज
वे हैं इशरत्व का विस्तार और सार
उनकी कृपा पर निर्भर है मेरा घर परिवार।

जब सुनती हूँ अपनी अंतरात्मा की आवाज़
होता है भीतर गुरुजी के वास का एहसास
ये एहसास होता है अति अनमोल और खास
और सुकून से लेती हूँ फिर मैं श्वास।

आँखें खुली होती हैं जब
उनकी अदृश्य मौजूदगी महसूस कर पाती हूँ तब
आँखें मूँद लेती हूँ जब
तो नज़र आने लगता है उनका स्वरूप तब।

उनकी रूहानी ख़ुशबू
जिससे महक उठती है मेरी रूह
देते हुए रूहानी जुड़ाव का प्रमाण
और गद गद हो जाता है गिरेबान।

सुनते हुए उनकी बतायी ग़ुरबानी
उनके ख़याल में खो जाती हूँ मैं निमानी
कभी आँसू बहने, कभी मुस्कुराहट आनी
बेशक हो मन में कोई परेशानी।

क्यूँकि याद दिलाते हैं महाराज
कि जो हो रहा है आज
वो है पिछले कर्मों का परिणाम
और उनकी शरण में निश्चित है कल्याण।

उनका दिया प्रोत्साहन बढ़ा रहा है मुझे आगे
उनकी कृपा से ही टूटेंगे मोह के धागे
गुरुजी महाराज ने थामा है जब से मेरा हाथ
उनकी मेहर से जब से नाता जुड़ा है उनके साथ
ज़िंदगी में हुए हैं ऐसे परिवर्तन
कि पहले जैसे नहीं रहा जीवन।

उन दयासिंधु के चरणों के तले की धूल बनकर जीयूँ
उनके चरणों का निर्मल अमृत पीयूँ
अब तो सोते जागते कहे ये मन
कि कभी ना छूटे गुरुजी का दामन।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

दया के महासिंधु (05/11/2026)

बनकर सबकी माँ (05/10/2026)

मई १०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००३

                     बनकर सबकी माँ

ऐसी कृपा है गुरुजी मेहरबाँ की
कि पिता के संग उनमें छवि बसी है माँ की
उनकी ममता का रूहानी स्पर्श
देता है अंतस को वो हर्ष
जिसकी उपमा नहीं की जा सकती
जिसके लिए शुकराना करते मैं नहीं थकती।

गुरुजी महाराज के आँचल में
बसती है माँ की ममता
वो ममता जिसमें है
हर घाव को भरने की क्षमता
उनका आँचल समेट लेता है
भक्त का हर इक आँसू
और इतना स्नेह बरसाते हैं वे
कि गद गद हो जाती है रूह
हर दुख हवा में कहीं ग़ायब हो जाता है
भीतर और बाहर गुरुजी का प्यार रंग लाता है।

गुरुजी महाराज के चरणों में
सुख का सुंदर संसार है
जो दुनियावी माता पिता के दुलार के भी पार है।

सच कहूँ तो दुनियावी माँ से बिछड़ कर
हुआ था मुझे गम जितना
उस से कहीं ज़्यादा सुकून मिला गुरुजी से
गुरुजी ने प्यार दिया है इतना।

परम पूज्य गुरुजी ने मुझे अपनाया
मोह और प्यार में फ़र्क़ समझाया
मेरा हाथ थामकर मेरा अकेलापन मिटाया
मेरी गलतियों के बावजूद मुझे गले से लगाया
मेरी सुख सुविधाओं का सदा रखते हैं वे ख़याल
दुविधा दूर करते हैं जब मन में होते हैं अनेक सवाल
कह देती हूँ उन्ही से अपने दिल की हर बात
इंतज़ार नहीं करना पड़ता क्यूँकि वे सदा होते हैं साथ
उनकी याद में है हर दिन शुरू करने की खुमारी
उनकी याद में रहकर होती है रात में सोने की तैयारी
खाने के हर दाने में है उनके प्रेम का रस
माँ की छवि लेकर वे मेरे ख़यालों में गए हैं बस
मैं तो हूँ एक छोटा सा टिमटिमाता तारा और उनका आँचल है असीम आसमाँ
गुरुजी तो अनगिनत तारों को संजोकर संभालते हैं बनकर सबकी प्यारी माँ।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरज

बनकर सबकी माँ (05/10/2026)

वे तो स्वयं भगवान हैं (05/09/2026)

मई ९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००२

        वे तो स्वयं भगवान हैं

जाने अनजाने में ही सही
पर जब तक सांसें हैं चल रही
अक्सर गलतियाँ और ग़फ़लत
होती हैं इंसान से
इसलिए हर दिन ज़रूरी है
माफ़ी माँगनी भगवान से।

होगा जो ग़लतियों का पश्चाताप
तो इस से मिटने लगेगा दुख संताप
इसलिए इसे महसूस कर के माँगना गुरुजी से क्षमा
गुरुजी की कृपा से आयेगा पाप जलने का समा।

भक्ति की अग्नि में
पाप जल जायेंगे
देखते ही देखते
कष्ट टल जायेंगे।

गुरुजी के नाम में है ऐसा प्रताप
कि मिटने लगता है दुख संताप
गुरुजी के दीये जाप में है वो शक्ति
जो स्वयं है पाप जलाने की युक्ति
मन हल्का होता है, आती है शुद्धि
विवेक का विकास होता है, मिलती है सुबुद्धि
मत पत का राखा हैं गुरुजी महाराज
पहले भी उन्होंने था संभाला, वे ही संभाल रहे हैं आज
कल भी वे ही संभालेंगे
भवसागर से निकालेंगे
क्षमाशील हैं वे, दयावान हैं
केवल गुरु नहीं, वे तो स्वयं भगवान हैं।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

वे तो स्वयं भगवान हैं (05/09/2026)

शिवत्व का असल स्वरूप (05/08/2026)

मई ८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३००१

                शिवत्व का असल स्वरूप

जो हैं शिवत्व का असल स्वरूप
जो हैं दिव्यता का परम पूजनीय रूप
उन गुरुजी महाराज को नमस्कार
उन्हें नमस्कार बारम्बार।

पुरुष रूपी चेतना की सूरत
प्रकृति रूपी माया की मूरत
इसलिए साक्षी होते हुए भी सबसे शक्तिमान
इसलिए ऊर्जा होते हुए दें वे सम्पूर्ण कारणात्मक योगदान।

और फिर प्रकृति और पुरुष के भी पार
गुरुजी महाराज हैं सारी सृष्टि का आधार
ऐसी स्पष्टता नजरिये में वे लाते हैं
कि कुछ अलग से ही नज़ारे नज़र आते हैं
भीतर भी और बाहर भी
ऐसी अद्भुत लीला है उनकी।

परब्रह्म परमेश्वर हैं वे
सदाशिव हैं, सर्वेश्वर हैं वे
अपनी मर्ज़ी से लेते हैं अनेकों रूप
उनकी मर्ज़ी से होती है छाओं और धूप
उनकी आज्ञा से समय चले अपनी रफ़्तार
उनके हुक्म पर मौसम आयें जाएँ बार बार।

गुरुजी मानव कल्याण के लिए आए यहाँ
बनकर इक साधारण इंसान
परंतु ज़्यादा वक़्त तक छुप ना पाई
उनकी लीला महान।

भक्तों के बिन जाने ही अक्सर
कल्याण कर देते हैं गुरुवर
स्थान और समय की सीमा के भी पार
होता है गुरुजी के द्वारा उद्धार
उनकी मर्ज़ी और मौज हो तो
वे तो एक पल में दे सकते हैं तार
यूँ ही तो नहीं उनकी महिमा से गूँज रहा है
ये सारा का सारा संसार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

नायाब नदर (05/07/2026)

मई ७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०००

                          नायाब नदर 

जब ‘मैं’ मिटे तो गुरु मिले
गुरु मिले तो नसीब खिले
व्यर्थ हैं बाक़ी सभी सिलसिले
इसलिए भूल कर सब शिकवे गिले
ख़ुद को गुरुजी में खोने का करो प्रयास
बेशक करना पड़ेगा अभ्यास
किंतु बनकर उनका दास
ये प्रयास आयेगा रास।

जितना शीघ्र उनके समक्ष तुम्हारा सयानापन मानेगा हार
उतनी जल्दी मिटने लगेगा तुम्हारा अहंकार
गुरुजी की कृपा तो बरस रही है अपरम्पार
परंतु गुरुजी यूँ ही नहीं सबको देते स्वयं में समाने का अधिकार।

तराशते हैं वे, परखते हैं
लेते हैं इम्तहान
मत पत के राखा भी वे ही हैं
वे ही चूर करते हैं अभिमान।

हर इम्तहान है इक कदम
जो लायेगा तुम्हें गुरुजी के क़रीब
उनके क़रीब होते होते उनमें खो कर ख़ुद को
जगा लो तुम अपना नसीब।

जिसने ख़ुद को खो कर
गुरुजी को पा लिया
उस जैसा खुशनसीब कोई नहीं
उसने जीते जी वो अमृत पिया
जो राज़ है हर पल की तृप्ति का
और सूचक है ये मुक्ति का
बस, मन में और मुख पर हो ये अर्ज़ी
कि चले केवल गुरुजी की मर्ज़ी।

बस, फिर क्यों कोई भी विलंब
क्यों ना करें शुभता का शुभारंभ
गुरुजी की शरण में
उनके कमल चरण में
गवाह बनेगी स्वयं गुरुजी की नूरानी नज़र
दया फ़रमाएगी गुरुजी की नायाब नदर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

नायाब नदर (05/07/2026)