गुरुजी सदा महसूस हों पास (08/03/2026)

अगस्त ३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८८

  गुरुजी सदा महसूस हों पास 

दिनचर्या के हर काम में
हर समय और हर स्थान में
काम में और आराम में
मग्न रहकर गुरुजी के नाम में
मिलता है इतना अद्भुत सा चैन
अक्सर नम हो जाते हैं नैन
भक्ति के चाव में
प्रेम के भाव में
गुरुजी महाराज के प्रति
और मन पकड़ लेता है गति
गुरुजी के ख़यालों की ओर
भूल कर कि रात है या भोर
और ले चलता है गुरुजी के दरबार में
परम पूज्य परमेश्वर के दीदार में।

यूँ जुड़ जाता है मन
देखकर गुरुजी के चरण
कि बाक़ी सब ख़याल हो जाते हैं दूर
वश में कर लेता है गुरुजी का नूर
मन को अपने प्रकाश से
सकारात्मक से सकाश से।

कुछ ऐसा अनोखा है गुरुजी महाराज का आकर्षण
छुड़वा देता है ये बाकी हर विकर्षण
कितना अच्छा हो जो गुरुजी में यूँ ही लीन रहे मन
वह सदा के लिए शांत और स्थिर जाएगा बन।

मन को भाता रहे गुरुजी का चिंतन
गुरुजी से है अरदास
सदा गुरुजी में लागे ये मन
गुरुजी से अर्ज़ी करे दास
जिसके मन का लगाव हो गुरुजी से खास
उसे गुरुजी सदा महसूस हों पास।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ज्ञान बिना… (08/02/2026)

अगस्त २, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८७

                                      ज्ञान बिना…

ज्ञान बिना भीतर हो भय
ज्ञान ना हो तो बढ़े संशय
भीतर के भय को हटाना होगा
हर संशय को मिटाना होगा
आगे बढ़ने के लिए
रूहानी सीढ़ी चढ़ने के लिए।

ध्यान बिना ज्ञान नहीं
ध्यान नहीं बिन सिमरन
अब तक ना हुआ तो अर्ज़ी करो
कि सिमरन में लग जाये मन…
वैसे ही जैसे गुरुजी चाहें
उज्जवल कर के तुम्हारी राहें।

गुरुजी की कृपा बिना
हो ना पाये उनका चिंतन
गुरुजी कृपा करें तो हो पाये
मन द्वारा उनका सिमरन।

गुरुजी की याद में रहने में है इक रूहानी मिठास
उनकी याद में रहने से बुझे आध्यात्मिक प्यास
लेकर उनकी याद में उनका नाम
उज्ज्वल रहेगा अंतस का धाम
उनके नाम के दीप का करो धन्यवाद
रह कर उनकी याद से आबाद।

जितना गहन होगा याद का भाव
उतना ही प्रेमपूर्ण होगा स्वभाव
गुरुजी में उतना ही रमते जाओगे
उनकी ओर बढ़ते जाओगे।

उससे अनेकों अधिक कदम
गुरुजी बढ़ायेंगे तुम्हारी ओर
तुम्हारा भय और संशय छूटता जाएगा
तुम्हारा अहंकार टूटता जाएगा
गुरुजी तुम्हें सुधारेंगे
गुरुजी तुम्हें संवारेंगे
अनुग्रहीत होगा बीज तुम्हारी भक्ति का
निकट आता जाएगा मंज़र मुक्ति का।

बिन किए और वक़्त ज़ाया
निखार लो अपनी रूहानी काया
जिसने गुरुजी की याद से जोड़ लिया सुर्त को
जिसने अपने भीतर समा लिया गुरुजी की मूरत को
वो रहे संदेह-मुक्त और निर्भय
जोड़कर गुरुजी से लय।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ज्ञान बिना… (08/02/2026)

तो बिल्कुल दूर नहीं फिर ईश (08/01/2026)

अगस्त १, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८६

                                तो बिल्कुल दूर नहीं फिर ईश 

गुरुजी के सिमरन में लागे जिसका मन
जो कर पाये गुरुजी का चिंतन
बड़ी कृपा है गुरुजी की उसपर
सिमरन नामुमकिन गुरु कृपा ना हो अगर।

सिमरन है मन के लिए अन्न
सिमरन है रूह के लिए भोजन
सिमरन से हो अंतस का पवित्रीकरण
सिमरन से रोशन हो जीवन।

चाहिए सिमरन का चाव
चाहिए सिमरन में भाव
सिमरन करे भीतर की शुद्धि
सिमरन से मत द्वारा सजे बुद्धि
सिमरन है ऊर्जा
सिमरन है पूजा
सिमरन सुधारे व्यवहार
सिमरन संवारे विचार
सिमरन से नियंत्रित हों विकार
सिमरन बढ़ाये गुरु के प्रति प्यार।

सिमरन ले जाये ध्यान में
सिमरन से बढ़ौती हो ज्ञान में
विवेक के संग
ऐसा है सिमरन का रंग।

सिमरन है गुरुजी की दी बख़्शीश
सिमरन में है गुरुजी का आशीष
सिमरन में झुक जाये जो मन का शीश
तो बिल्कुल दूर नहीं फिर ईश।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तो बिल्कुल दूर नहीं फिर ईश (08/01/2026)

जो मैं किया सो मैं पाया (07/31/2026)

जुलाई ३१, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८५

                                      जो मैं किया सो मैं पाया 

जो मैं किया सो मैं पाया
ऐसे ही पिछला कर्म प्रारब्ध बन कर आया
प्रारब्ध से कोई नहीं बच पाया
पीछा ना छोड़े इसका साया।

प्रारब्ध को भोगना है मजबूरी
इसका कटना है ज़रूरी
इसी से कम होता है कर्मों का भार
कर्मों का संचय कम हो जाता है
नियम है ये निरंकार का
उपाय है ये उद्धार का।

कल्याण के द्वार का
रास्ता है यही
खुशनसीब हैं वे
जिन्हें पूरण गुरु की शरण है मिली।

गुरुजी महाराज के चरणों में
है शुक्राना ही शुक्राना
उन्होंने जो अपनाया है
बना लिया अपना दीवाना
उनके चरणों में है हित
वहीं पर हर कर्म हो अर्पित
उन्हें के चरणों से जुड़ा रहे मन
उन्ही के चरणों में बीते जीवन
प्रारब्ध भी वे ही कटवायें
अपनी कृपा से तारते जायें
अपने आँचल में दें पनाह
अपने में ही लें समा
जब यहाँ से विदायी की बेला आए
जीवन का अंतिम वेला आए।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

जो मैं किया सो मैं पाया (07/31/2026)

ना जाने कब… (07/30/2026)

जुलाई ३०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८४

                                     ना जाने कब…

ना जाने कब टूट जायें साँसों की लड़ियाँ
व्यर्थ ना जाने पायें ये घड़ियाँ
हर घड़ी है अनमोल
भौतिकता के पार है इसका तोल।

दिनचर्या को बिन रोके
मिलते रहेंगे मौके
सेवा, सिमरन, सत्संग के
गुरुजी की ही किरपा से
हर मौके को आशीर्वाद जान कर
तुम उस से लेना अपनी झोली भर
और भीगते हुए हर आशीर्वाद में
रहते चलना गुरुजी की याद में।

कोई पल, कोई घड़ी, कोई भी दिन
ना गुज़रने देना गुरुजी की याद के बिन
हर श्वास से लेकर गुरुजी का नाम
महसूस करना अपने भीतर का पावन धाम।

वहाँ तुम्हारे हृदयकमल के आसन पर
गुरु साहिब हैं विराजमान
उनकी याद में रहकर उनपर धरोगे ध्यान
तो उन्हें देख पाओगे वहाँ।

उन्ही पर रखते हुए पूर्ण विश्वास
उनमें लीन कर के हर श्वास
हर पल, हर घड़ी को सार्थक बनाना
क्या मालूम कब अगला श्वास हो जाये बेगाना।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

ना जाने कब… (07/30/2026)

जब से गुरुजी ने है अपनाया (07/29/2026)

जुलाई २९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८३

                                       जब से गुरुजी ने है अपनाया 

जब से गुरुजी ने है अपनाया
क्षीण हुआ कष्टों का साया
निखरने लगी रूह की काया
गुरुजी का प्यार भीतर है समाया।

गुरुजी बिन जीवन में था एक अकेलापन
दुनियावी अपनों के बीच में भी ना लगता था मन
भारी लगता था हर बोझ
समझ ना आता था मन किसे रहा है खोज।

गुरुजी बिन दिन के उजाले में भी था अंधकार
भयभीत करता था संसार का व्यापार
रास्ता आता ना था नज़र
रुकावट से घिरी होती थी डगर।

ज़िंदगी लगने लगी थी मुश्किल
क्यूँकि लगता ही नहीं था कहीं भी दिल
गुरुजी जो मिले
तो बंद रास्ते खुले
मुरझाये नसीब खिले
मिटने लगे शिकवे गिले।

गुरुजी में दिल यूँ गया लग
जैसे हर सोई तार गई जग
इक नया उल्लास
इक नया विश्वास
मिली जो गुरुजी की दिशा
तो दूर हुई निराशा की निशा।

सिमरन और सत्संग है गुरुजी ने बख़्शा
करते हैं वे मेरी रक्षा
बुलाकर अपने दर पर
सेवा का दिया अवसर
रखा अपना हाथ मेरे सिर पर
अपने नूर से रोशन की मेरी डगर।

गुरुजी ने थाम ली मेरी जो डोर
तो फिर अपना तो कुछ रहा ही नहीं
सब गुरुजी महाराज के चरणों में अर्पित
जो वे करें, जब करें, जैसे करें, वही सही।

गुरुजी ही हैं अब मेरा संसार
इस पार और उस पार
ये प्यार है या सत्कार
ये जानें वे ही कृपाधार
जिनके कमल चरण के तले
मुझे सुख संतोष का संसार मिले।

अब तो गुरुजी ही प्रेम
गुरुजी ही पूजा
सनातन साथ के लिए
ना चाहिए कोई दूजा।

गुरुजी का शुक्राना करने के लिए
मेरे पास नहीं हैं पर्याप्त अल्फ़ाज़
हर श्वास में शत शत शुक्राना ही हो
ऐसा बना रहे मेरे जीने का अंदाज़।

सर्वसंपन्न रहें मेरे गुरु रूपी भगवान
सदा रहें वे सर्वशक्तिमान
गुरुजी की महिमा का हो पूरी सृष्टि में गुणगान
गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरुजी को सादर प्रणाम।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

जब से गुरुजी ने है अपनाया (07/29/2026)

नदिया बहे सागर की ओर (07/28/2026)

जुलाई २८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८२

                                       नदिया बहे सागर की ओर 

नदिया बहे सागर की ओर
उसके लिए ना ही कोई और छोर
ना पत्थर ना कंकड़ में उसे रोकने की हिम्मत
ना तूफ़ान कर पाये उसे रोकने की ज़ुर्रत
सागर की ओर ही आकर्षित है नदिया का दिल
सागर ही है उसका स्रोत और मंज़िल।

गुरुजी महाराज की कृपा रहे
मेरा दिल भी उनकी ओर यूँ बहे
जैसे नदिया का सागर की ओर
ऐसे जुड़ी रहे गुरुजी से डोर
जीवन भर हर जनम में
रहूँ गुरुजी के कमल चरण में।

बहूँ वहीं, रहूँ वहीं
भाव वहीं, चाव वहीं
दिल वहीं, रूह वहीं
गुरुजी के कमल चरण में।

मेरी कोई बूंद भी तो मेरी नहीं
गुरुजी सागर, मैं उनके बिन कुछ भी नहीं
उन्ही में समाकर ही पूरी हो पाऊँगी
तब तक उनकी ओर बहती जाऊँगी
उनकी मेहरबानी से
उनकी निगरानी में
दिन रात निहारते हुए उनका सुहाना साथ
शुक्राना में जोड़े हुए अपने हाथ
गुरुजी में समाने की इंतज़ार में
बहती हुई उनके प्यार में।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

नदिया बहे सागर की ओर (07/28/2026)

गुरुजी महाराज दिखाते हैं रास्ता अंधकार में भी… (07/27/2026)

जुलाई २७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८१

                                  गुरुजी महाराज दिखाते हैं रास्ता अंधकार में भी…

गुरुजी महाराज दिखाते हैं रास्ता अंधकार में भी
वे सुनते हैं तुम्हारी चुप्पी की भी आवाज़
ना करना उनके हुक्म को नज़रअंदाज़
उनके हुक्म में है तुम्हारे कल्याण का राज़।

गुरुजी की हर बात होती है पत्थर पर लकीर
इसमें नहीं कोई संशय
गुरुजी से जोड़ कर तार और लय
दूर हो जाये हर भय।

कोई और समझे या ना समझे तुम्हे
गुरुजी तुम्हें समझते हैं
तुम्हारे कल्याण के लिए
वे तुम्हारी नियति के रास्ते भी बदलते हैं
इसलिए शिकायत ना करो
बल्कि सम्मान करो उनके हर हुक्म का
क्यूँकि उनके हर हुक्म का पालन करने से
रूप संवरेगा तुम्हारे जीवन का।

ना जाने कितनों का जीवन बीत जाता है
गुरु को पाने की कोशिश में ही
तुम बड़ी किस्मत वाले हो
कि गुरुजी ने तुम्हें शरण दी।

रखो इत्मिनान
देते चलो इम्तहान
जो संभाल रहे हैं सारा जहाँ
जिन्हें सलाम करते हैं ज़मीन आसमाँ
वे गुरुजी हैं परवरदिगार
वे ही करेंगे तुम्हारा भी बेड़ा पार
उनसे जोड़ कर रखो तुम सीधी तार
करो उनके हर हुक्म को स्वीकार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी महाराज दिखाते हैं रास्ता अंधकार में भी… (07/27/2026)

गुरुजी की बंदगी की दात (07/26/2026)

जुलाई २६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०८०

                                                         गुरुजी की बंदगी की दात 

जिसे गुरुजी की बन्दगी की दात मिल गई
उसकी तो किस्मत खिल गई
दर मिल गया उसे गुरुजी के रूप में भगवान का
द्वार खुल गया उसके लिए कल्याण का।

पाकर गुरुजी की बंदगी
सँवर जाती है भक्त की ज़िंदगी
कितनों की सोयी क़िस्मत है जगी
पाकर गुरुजी की बख़्शिंदगी।

सेवा, सिमरन, सत्संग में है बंदगी
भाव के भोलेपन और नीवेंपन में बसती है बंदगी
अपनी ग़लतियों की शर्मिंदगी में और समर्पण में है बंदगी
बंदा बनने में है बंदगी।

बंदगी गुरुजी महाराज की
बीते कल की और आज की
और आने वाले कल की भी
जिसने भी शिद्दत से की
संवर गई उसकी गति
सुधर गई उसकी मती
कम करें उसके कर्मों का भार
स्वयं गुरुजी किरपाधार।

बंदगी से बिगड़े काम जायें बन
बंदगी से स्थिर और शांत हो जाए मन
बंदगी की दात है गुरुजी का दिया प्रसाद
इस दिव्य दात के लिए गुरुजी का धन्यवाद।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी की बंदगी की दात (07/26/2026)

हो रही थी शाम… (07/25/2026)

जुलाई २५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३०७९

                                                  हो रही थी शाम…

हो रही थी शाम
ख़त्म कर दिनचर्या के काम
आया जन बैठने गुरुजी के पास
था कुछ कुछ सहमा, और थोड़ा उदास।

उसने माथा टेका
फिर गुरुजी को देखा
उसने गुरुजी से कुछ कहना चाहा तब
गुरुजी ने उसे वहीं रोक दिया तब
और उस से कहा कि वे जानते हैं सब
और वे सुधारेंगे सब सही समय आयेगा जब।

जन की आँखों में तसल्ली के आँसू आए
उसके लब मुस्कुराए
बिन किए कोई अगर मगर
उसने आज्ञा लेकर जारी रखा सफ़र
रखता चला श्रद्धा और सबर
कई वर्ष गए गुज़र।

धीरे धीरे हालात सुधरते गए
सिमरन से मनोबल के धागे मज़बूत हुए
गुरुजी दिखाते चले उसे राह
बख़्शते हुए हर दिन नया उत्साह।

गुरुजी की भक्ति में मगन
जन गुज़ारता गया जीवन
कर के हर कर्म गुरुजी को अर्पण
गुरुजी से जोड़े हुए मन।

कारज आए रास
भीतर बढ़ता गया उल्लास
गुरुजी के मिलन का इच्छुक
जन बना उनके चरणों में भिक्षुक।

गुरुजी करते रहे जन का कल्याण
जन भी गुरुजी को हाज़िर नाज़िर मान
गुरुजी को देकर अपना सर्वस्व भरा मान
करता रहा उनके नाम अमृत का पान।

गुरुजी ने बनाया उसे अपना गण
गुरुजी के नूर से उजला हुआ उसके अंतस का दर्पण
हर सुबह, हर शाम हुई सुंदर
गुरुजी का वास जो था सदा उसके भीतर।

जैसे जन का हुआ उद्धार
सारी संगत का हो बेड़ा पार
सभी का हो गुरुजी से निस्वार्थ प्यार
सभी को मिले गुरुजी का प्यार बेशुमार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

हो रही थी शाम… (07/25/2026)