कैसे करूँ वंदन आपका… (09/17/2026)

ितंबर १७, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१३३

                            कैसे करूँ वंदन आपका…

परम पूज्य गुरुवर,

कैसे करूँ वंदन आपका
किस मुंह से करूँ नमस्कार
जनम जनम से भटक रही हूँ
ढोये हुए पापों का भार।

वरना ना होती मैं मनुष्य रूप में
मृत्यु लोक की छाओं धूप में
शुक्र आपका और उस पुण्य का
कि इस जन्म में मिला है सानिध्य आपका।

जानती नहीं क्या किया था मैंने
अपने पिछले जन्मों में
इस जनम में भी अवश्य की होगी ग़फ़लत
अपने कई कर्मों में।

मुझे तो केवल सकता है तार
आप महाराज का किया उपकार
बुलाते रहिएगा मुझे बारम्बार
आती रहूँ मैं आपके द्वार।

आप इतने दयावान हैं
सदा ही मेहरबान हैं
जैसी हूँ, वैसी आपने स्वीकार लिया
मेरे पिछले कर्मों का भार लिया
आप ही चला रहे हैं चुनौतियों से भरे इस जीवन में
आप ही पूर्ण सहायक हैं मन और जीवन के परिवर्तन में।

निराशा बदल रही है आशा में यहाँ
जाग रहा है सिमरन का उत्साह
सुलझ रही है जीने की राह
बढ़ रही है आपको पाने की चाह।

आपकी मेहर से होगा सब उचित
आपकी कृपा से होगा हित
हो ही रहा है बल्कि हर पल
वरना गुज़ार ना पाती आज और कल।

पापों के भार से मुक्ति दीजिए
होनहार बने रहने की युक्ति दीजिये
आप पर विश्वास की हो वृद्धि
दीजियेगा शुद्धि और सुबुद्धि
बीता कल संभाला आपने, आप संभाल रहे हैं आज
आप ही कल भी संभालेंगे , मेरे सुंदर दयालु सरताज।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

कैसे करूँ वंदन आपका… (09/17/2026)

शरणागत का भार (09/16/2026)

ितंबर १६, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१३२

                      शरणागत का भार 

गुरुजी लेते हैं शरणागत का भार
इसलिए बेपरवाह हो जाओ
खुद को और अपने जीवन को उन्हें सौंप कर
गुरुजी में तुम खो जाओ
राज़ी हैं वे जैसे तुम्हें रख कर
तुम रहना सीखो उसी हाल में
तुम्हारा कल्याण निश्चित है
गुरुजी की संभाल में।

लीला विचित्र है उनकी
पकड़ लो डोर उनके नाम के धुन की
उन्ही की है मायाशक्ति
उन्ही की है कृपाशक्ति
बेशक जो दुर्गति हो या सद्गति
उन्हें करने दो निर्णय
तुम बस उनकी शरण में रहकर
करते चलो अपना कर्तव्य।

क्यूँकि तुम्हारे बस में है बस स्वतंत्र इच्छा तुम्हारी
और कुछ भी नहीं
उनके चरणों में समर्पण करने में करो ईमानदारी
वे अपने अनुसार करेंगे सही
और उनका हर फैसला और हुकुम
संवारता चलेगा तुम्हारा जीवन।

गुरुजी की मेहर-ए-नज़र से
तुम में और तुम्हारे जीवन में बदलाव आयेगा
होगा ऐसा परिवर्तन
कि तुम भीतर और बाहर से निखर जाओगे
तुम्हारे निखार पर होगा गुरुजी की कृपा का असर
हर परिस्थिति में अनुग्रहित रहेगा तुम्हारा सफ़र।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

जनम जनम की बिगड़ी रही है बन (09/15/2026)

ितंबर १५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१३१

जनम जनम की बिगड़ी रही है बन

जनम जनम की बिगड़ी रही है बन
फिर क्यों परेशान है तेरा मन?
गुरुजी ने बुलाया है तुझे अपनी शरण
कर रहे हैं वे तेरे कष्टों का हरण।

करना मुश्किल है और कहना है बहुत आसान
कि धीरज रख और ना हो परेशान
कि ख़त्म होगा ये इम्तहान
पर यकीन रखता चल कि गुरुजी करेंगे समाधान।

अगर चल रही है कब से या अगर समस्या बड़ी है
तो भी गुरुजी की रखवाली साथ खड़ी है
वरना इससे भी ज़्यादा बुरा होता तेरा हाल
इस प्रसंग में तेरे मन में नहीं संशय या सवाल
ये तेरा उनपर विश्वास कह रहा है
और जो तू ये सब सह रहा है
बाक़ी सब फ़र्ज़ निभाते हुए
गुरुजी ही दे रहे हैं ये हिम्मत भी
वे ही बख़्श रहे हैं ताक़त भी।

तू है गुरुजी के अधीन
वो भी हैं तेरे पराधीन
बढ़ाता चल शुक्राना का भाव
बढ़ाता चल सकारात्मकता का स्वभाव
जीवन अवश्य होगा सार्थक
गुरुजी हैं तेरे जीवन के संचालक
बंदगी के धागे नहीं होते कमज़ोर
गुरुजी चला रहे हैं तुझे मंज़िल की ओर।

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जय गुरूजी 🙏🙏
धीरजा

जनम जनम की बिगड़ी रही है बन (09/15/2026)

गुरुजी आए दासी के पास (09/14/2026)

ितंबर १५, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१३०

                                 गुरुजी आए दासी के पास 

लगाए हुए दिल से आस
कि गुरुजी आयेंगे उसके पास
इक दासी कर रही थी तैयारी उनके आगमन की
सजावट की उसने गुरुजी के लिए आसन की।

लाल शनील के वस्त्र से
आसन को उसने सजाया
सुनहरा दुपट्टा गुरुजी के लिए रखा वहाँ
तैयारी में वक़्त ना जाने गया कहाँ।

अपने दिल की बगिया से
वह प्रेम के फूल तोड़ कर लायी
आसान के आसपास उन्हें बिछाने पर
वह ख़ुद भी फूली ना समायी।

दीप में डाला श्रद्धा का घी
गुरु चरणों के लिए बिछाया मख़मल भी
साथ में पंख मोर के
फिर देखने लगी दरवाज़ा ग़ौर से।

मन की ज्योत जलाई उसने
फिर गुरुजी को प्यार से पुकारा
महाराज तो करुणानिधान हैं
देने आए दासी को सहारा।

दासी ने गुरुजी के आने पर
सराहा अपना नसीब और घर
परात में जल वह आई लेकर
गुरुजी आसन की ओर आए उसका हाथ पकड़कर।

गुरुजी की यह इनायत
सपना था या हकीकत
दासी को आ ना रहा था समझ
फिर धीरे धीरे विश्वास से भाव गया सुलझ।

गुरुजी की दिव्य ख़ुशबू से
महक रहा था वातावरण
गुरुजी को आदर से आसन पर बैठाकर
दासी ने धोए उनके चरण।

गुरुजी ने उसे चरणोदक पीने के लिए कहा
दासी ने शुक्राना कहा और किया उस अमृत का पान
अमृत भीतर जा रहा था
आँख में अश्रु आ रहा था
गुरुजी तो समझ गए थे सब
एक अकल्पनीय रूहानी अनुभव हुआ तब।

गुरुजी का चेहरा हुआ लाल
दासी के मन में उठे सवाल
मानो गुरुजी कर रहे थे मन में कोई पाठ
फिर उन्होंने अपने पीछे की ओर किया अपना हाथ
अचानक प्रकट किया उन्होंने
सचखंड का कढ़ा प्रसाद
बुलाया दासी को अपने पास
देने अपना आशीर्वाद।

दासी तो थी आश्चर्यचकित और भावविभोर
दीन भाव से देखा उसने गुरुजी की ओर
खड़ी हुई जाकर गुरुजी के समक्ष
देख रही थी अपने रब को प्रत्यक्ष
गुरुजी ने दिया उसे वह प्रसाद और पूरा खाने के लिए कह दिया
दासी ने हुक्म माना और उस प्रसाद का गर्म सेक भी सह लिया।

गुरुजी उसे देखकर मुस्कुराए
इस से पहले कि दासी कुछ कह पाये
गुरुजी ने उसे अपने चरणों में बैठाकर
उसके सिर पर फेरा अपना हाथ
और कहा दासी से कि वे सदा सदा ही
रहेंगे उसके साथ।

फिर वे उठ गए अचानक से
और दासी ने छुए उनके चरण
गुरुजी हो गए अंतर्धान
देकर दासी को अपने सानिध्य का वरदान।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी आए दासी के पास (09/14/2026)

आपके दरबार में… (09/13/2026)

ितंबर १३, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१२९

                        आपके दरबार में…

परम पूज्य गुरुवर,

आपके दरबार में
आपके दीदार में
नाम के खुमार में
खो गई मैं, खो गई मैं
आपके ही प्यार में।

चरणों में बुलाकर
आपने दिया दुलार
जीवन बिखर रहा था
आपने दिया संवार।
आपके ही धाम में
आपके पैग़ाम में…
नाम के खुमार में
खो गई मैं, खो गई मैं
आपके ही प्यार में।

हर पल अंग संग हो
गुरुजी आप मेरे
एहसास ये होता
मुझको शाम सवेरे।
आपके ही संग में
आपके ही रंग में…
नाम के खुमार में
खो गई मैं, खो गई मैं
आपके ही प्यार में।

आपकी रहमत से ही
है ये ज़िंदगी
आपसे मत पत मेरी
आपसे ही बंदगी।
आपकी हर देन में
आपके ही प्रेम में…
नाम के खुमार में
खो गई मैं, खो गई मैं
आपके ही प्यार में।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

आपके दरबार में… (09/13/2026)

मिले हैं लम्हे प्यार के (09/12/2026)

ितंबर १२, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१२८

                             मिले हैं लम्हे प्यार के 

मिले हैं लम्हे प्यार के
गुरुजी के दीदार के
गुरुजी के दिव्य दुलार के
उनकी कृपा अपार के।

गुरुजी की छवि को निहारो
उनकी वड्डीयायी को सराहो
प्रेमा भक्ति से उन्हें रिझाओ
उनमें खो कर ख़ुद को पाओ
क्यूँकि तुम हो उन्ही का हिस्सा
उन्ही से शुरू, उन्ही पर ख़त्म है तुम्हारा क़िस्सा।

वे केवल गुरु नहीं है तुम्हारे
वे हैं तुम्हारे अखंड सहारे
तुम्हें बुलाकर अपने द्वारे
उन्होंने तुम्हारे काज हैं संवारे।

पिछले भी, और आज के भी
तुम तर रहे हो यूँ ही तो नहीं
उनकी रहमतें हैं कई हज़ार
तुम उनका शुक्राना करो बारम्बार।

गुरुजी जानते हैं ये समय है बहुत कठिन
और ये कि यह चला है अनगिनत दिन
वे ही जानें इस मुश्किल का अंत होगा कब
तुम्हें और भी धीरज रखना होगा अब।

इसलिए गुरुजी के सानिध्य में बैठना है अनिवार्य
ताकि उनके दिए सब्र और सुमत से सजा लो तुम्हारा हर कार्य
कड़वा ज़रूर है विष इतने कठिन इम्तहान का
लेकिन इसके पश्चात होगा जो अमृत परिणाम का
वह होगा मीठा और शीतल
और उस से धुल जाएगा हर मल।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

मिले हैं लम्हे प्यार के (09/12/2026)

गुरुजी की याद में… (09/11/2026)

ितंबर ११, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१२७

                      गुरुजी की याद में…

गुरुजी की याद में
जब दिन गुज़रता है
तो कैसे कटेगा हर लम्हा
ये नहीं सोचना पड़ता है।

याद कर के उनका नूर
गम का अँधेरा हो जाता है दूर
याद कर के उनकी सरलता
उनकी प्रेरणा में हर श्वास है ढलता।

याद उनके दिए आश्वासन की
याद उनके अनुशासन की
गुरबानी में भी उनके विचार
उनकी हर याद में उनके लिए प्यार।

जब याद आता है उनका सत्संग
तो सुनहरा होने लगता है मन का रंग
उनकी याद में रहकर होता है जो चिंतन
उस से मिलता है धीरज का धन।

गुरुजी की याद में रहकर सेवा में है जो आनंद
वह मिलता है कहीं और नहीं
जब भी उनका स्वरूप आता है नज़र
तो भरोसा बढ़ता है कि सब होगा सही।

गुरुजी की याद में
उनके संग अनुभव भी होते हैं शामिल
जैसे जैसे वे याद आते हैं
गुरुजी से और भी प्यार करने लगता है दिल।

याद आता है उनका चरणोदक और लंगर प्रसाद
अनेक प्रसंगों से जुड़ कर आती है उनकी याद
रहती है संग जो गुरुजी की याद
तो महसूस होता रहता है उनका आशीर्वाद
अंतस रहता है उनके ख़यालों से आबाद
ये है उन्ही का किरपा प्रसाद।

गुरुजी की याद में उनका सानिध्य है
उनकी याद स्वयं में प्रसाद दिव्य है
उनकी याद में जीवन जो जाये गुज़र
तो अत्यंत खूबसूरत रहेगा ये सफ़र।

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जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी की याद में… (09/11/2026)

तुम्हारा ये अकेलापन (09/10/2026)

ितंबर १०, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१२६

                                   तुम्हारा ये अकेलापन 

तुम्हारा ये अकेलापन
ये है गुरुजी का निमंत्रण
उनकी शरण में
उनके कमल चरण में।

ये सज़ा नहीं बल्कि है आशीर्वाद
इसके लिए करो गुरुजी का धन्यवाद
ये है ऐसा अनमोल एकांत
जिसमें तुम्हारा मन होगा शांत।

कोलाहल बढ़ता रहेगा वरना
मुश्किल होता जाएगा तरना
कहीं हो ना जाये देर
दूर ना होती जाये सवेर।

बाहर के कलयुगी स्पंदन ने
किया है तुम्हारे मन पर असर
झुका लो गुरु चरणों में शीश
वहीं पर मिलेगी गुनाहों की भी बख़्शीश।

क्यूँकि बेशक तुम हो अनजान
तुम हो दुनिया में रहने वाले इंसान
हुए होंगे तुमसे जो अनुचित कर्म और पाप
गुरुजी की मर्ज़ी हुई तो वे कर देंगे माफ़।

गुरुजी की शरण में तुम हो सुरक्षित
तुम्हारे कलह क्लेश जायेंगे मिट
उनके कमल चरण में है तुम्हारा हित
ये है निश्चित।

मिटाओ अपना अकेलापन
करो गुरुजी के सानिध्य का आलिंगन
स्वीकार लो गुरुजी का निमंत्रण
ये सबको नहीं मिलता है
और जिसे मिल जाता है ये
उसका नसीब अवश्य खिलता है।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

तुम्हारा ये अकेलापन (09/10/2026)

दिन भी गया बीत… (09/09/2026)

ितंबर ९, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१२५

                                   दिन भी गया बीत…

दिन भी गया बीत
रात भी गई गुज़र
मौसम बदलते गए
चलता जा रहा है सफ़र
कब उम्र जाएगी गुज़र
और जड़ में मिलेगा ये शरीर जड़
ना जानूँ मैं, ना जानो तुम
सभी हैं प्रपंच में गुम।

हैं बीच हमारे
ऐसे कुछ विरले जन
जो अपनी कोशिश और गुरु कृपा से
गुरुजी के गण गए हैं बन
क्यों ना उनसे लेकर प्रेरणा
सम्मानित करके अपनी चेतना
चल दें उनके रास्ते
अपने मंगल के वास्ते।

बहुत सुंदर है संसार
बहुत प्यारा है घर परिवार
पर ये ना काम आयेंगे उस पार
जहाँ रूह का सफ़र रहेगा बरकरार।

आने वाले दिन रात ना जायें बेकार
सही मौसम का ना करें इंतज़ार
गुरुजी को याद करने के लिए श्रेष्ठ है हर मौसम
उनका नाम भजने के लिए उत्तम है हर वेला, हर क्षण
बल्कि हर वेले और मौसम का सदुपयोग करना है तो
दिनचर्या के साथ गुरुजी की याद में जाओ खो
अच्छा हो या बुरा, समा अच्छे से कट जाएगा
मन में जो होगा कोई संशय, तो वह भी मिट जाएगा
स्पष्टता आती रहेगी
दुविधा जाती रहेगी
गुरुजी की दया बरसाती रहेगी
हम पर रहमतें कई हज़ार
और गुरुजी की मेहर-ए-नज़र से
होता रहेगा हमारा उद्धार।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

दिन भी गया बीत… (09/09/2026)

गुरुजी ने तुम्हें चुना है (09/08/2026)

सितंबर ८, २०२६

ओम नमः शिवाय
आज का सुविचार 🙏🙏

# ३१२४

                               गुरुजी ने तुम्हें चुना है 

गुरुजी ने तुम्हें चुना है
अपनी संगत है बनाया
उनका गुणगान करो
ना करो व्यर्थ में वक़्त ज़ाया।

कोई अपनी मर्ज़ी से नहीं पहुँच सकता गुरुजी के पास
ये होता है गुरुजी का ही बुलावा ख़ास
उसे साधारण मौक़ा ना लेना समझ
और अहम में ना जाना उलझ।

गुरुजी ने तुम्हें तारने के लिए बुलाया है
तुम्हारे उद्धार के लिए रास्ता दिखाया है
तुम्हें कर्म करते हुए ना जाने हुए कितने जनम
रात दिन अक्सर विचलित होता है तुम्हारा मन
ऐसे में मिली है जो गुरुजी की शरण
तो कमा लो उनके नाम ध्यान का धन।

विरलों को मिलता है ये सुख
गुरु चरणों में समर्पित करो हर चिंता और दुख
वैसे भी और कोई है नहीं उनके सिवा
जिसके पास हो तुम्हारे मर्ज़ की दवा।

गुरुजी ही वैद्यनाथ हैं
वे ही विश्वनाथ हैं
वे ही शाश्वत नाथ हैं
वे ही सदा साथ हैं।

उनके चरणों में लगाओ लगन
उनकी याद में रहो मगन
मंगलकारी है उनका स्तवन
करो उनकी स्तुति हर क्षण।

सोते जागते करो गुरुजी को याद
उनका सानिध्य है अनमोल आशीर्वाद
बाक़ी सब संगी-साथी मौसम के जैसे रहेंगे आते जाते
और वक़्त के साथ भर जाएँगे तुम्हारे कर्मों के खाते
केवल गुरुजी कर सकते हैं तुम्हारा खाता साफ़
केवल वे कर सकते हैं तुम्हें माफ़
वे चाहें तो लेखा लिख देंगे दोबारा
ख़ुशक़िस्मती से तुम्हें मिला है उनका सहारा
तुम्हारे कल्याण का हो चुका है आरम्भ
अपनी ओर से ना करो विलंब
गुरुजी से जुड़े रहने का जारी रखो प्रयास निरंतर
गुरुजी दीनदयाल हैं और बहुत दयालु है उनका दर।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

जय गुरुजी 🙏🙏
धीरजा

गुरुजी ने तुम्हें चुना है (09/08/2026)